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8. The Wedding of the Lamb

8. ६ मेम्ने का विवाह

प्रश्न: उन विवाह समारोह के विषय में सोचिए जिनमें आप सम्मिलित हुए हैं। उनमें से सबसे ज्यादा यादगार कौन सा समारोह रहा? और वह किस कारण से विशेष रहा ?

 

परमेश्वर को ढूंढना और जानना

 

एरविन लुटजर बगदाद के एक व्यापारी की कहानी बताते हैं जिसने किसी काम से अपने सेवक को बाजार भेजा। जब सेवक ने अपन काम पूरा कर लिया और बाजार से निकलने ही वाला था, कि वह एक मोड़ पर श्रीमती मृत्यु से मिला। उसके चेहरे के भाव से वह इतना डर गया कि वह बाजार से निकल कर तेजी से घर चला गया। उसने अपने स्वामी को बताया कि क्या हुआ था और उनका सबसे तेज घोड़ा मांगा ताकि जितना सम्भव हो वह श्रीमती मृत्यु से उतना दूर जा सके। एक घोड़ा जो रात होने से पहले उसे सुमेरा पहुंचा दे। बाद में उसी दोपहर व्यापारी भी बाजार गया और उसकी भी मुलाकात श्रीमती मृत्यु से हुई। उसने पूछा, ‘‘आज सुबह तुमने मेरे सेवक को हैरान क्यों कर दिया?’’ श्रीमती मृत्यु ने उत्तर दिया, ‘‘मेरा तुम्हारे सेवक को चैंकाने का इरादा नहीं था बल्कि मैं तो स्वयं ही चौंक गयी थी। आज सुबह तुम्हारे सेवक को बगदाद में देखकर मैं इसलिए चौंक गयी क्योंकि आज रात सुमेरा में मेरी उससे मुलाकात है।

 

आपका और मेरा मृत्यु के साथ मिलने का एक समय निर्धारित है। हम उससे भाग नहीं सकते और उससे छिप सकते हैं। हम केवल उसका सामना कर सकते हैं। ‘‘27 और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।’’ (इब्रानियों :२७) धन्यवाद हो कि स्वर्ग में वह ईश्वर है जिसने कहा है, ‘‘मैं तुझे कभी छोडूंगा, और   कभी तुझे त्यागूंगा।’ (इब्रानियों १३:) हमें मृत्यु का सामना अकेले करने की आवश्यकता नहीं है। मसीह ने कहा है कि वह युग के आने तक हमारे साथ रहेगा।

 

जब जॉर्ज बुश (सीनियर) उप राष्ट्रपति थे, तो पूर्व कम्युनिस्ट रूसी नेता लीयोनिड ब्रेजेनिव के अंतिम संस्कार के समय उन्होंने यू.एस का प्रतिनिधित्व किया था। ब्रेजेनिव की विधवा द्वारा किए गए शांत विरोध से बुश बेहद भावुक हो गए थे। वह ताबूत के पास बिना हिले-डुले तब तक खड़ी रहीं जब तक उसे बन्द नहीं कर दिया गया। तब, जैसे ही सैनिकों ने ढक्कन छुआ ब्रेजेनिव की पत्नी ने बहुत बहादुरी और आशा का कार्य किया, एक ऐसा भाव जो अब तक के सत्याग्रह आन्दोलन के कार्यों में बहुत ही खास माना जाना चाहिए। उसने नीचे झुककर अपने पति के छाती पर क्रूस का चिन्ह बनाया। वहाँ उस धर्म से सम्बन्ध रखने वाले, ईश्वर को मानने वाले महल में उस व्यक्ति की पत्नी इस बात की आशा रखती थी कि उसका पति गलत था। वह इस बात की आशा रखती थी कि एक दूसरा जीवन है और यह कि इस जीवन का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व यीशु द्वारा किया गया जो क्रूस पर मर गया और यही यीशु शायद अब भी उसके पति पर करूणा करे। एक तरफ कम्युनिस्ट राष्ट्र का एक अगुवा था जो मसीह के ज्ञान और उसके वचन को मिटाना चाहता था, और दूसरी तरफ उसकी पत्नी एक गुप्त विश्वासी जिसके हृदय में अनन्तकाल के विचार थे।          

 

हमने अब तक पिछले पांच अध्ययनों में यह देखा कि परमेश्वर भविष्य के बारे में क्या कहता है और हम अनन्तकाल कहां बितायेंगे। जिस तरह से यह संसार तैयार किया गया है, हमें उससे बढ़कर होने के लिए बनाया गया है। हमारा एक शत्रु है जो केवल इस संसार की ही बातों में हमें उलझाए रखना चाहता है। वह दुश्मन शैतान मसीह में हमारे अगले जीवन, एक बेहतर जीवन, के हमारे सारे विचारों को कुचल देना चाहता है। वह नहीं चाहता कि हम अनन्तकाल पर ध्यान करें, बल्कि यह चाहता है जिस भौतिक संसार में हम हैं उससे आकर्षित हों और बेवकूफ ओर बेअसर रहें। शत्रु यह नहीं चाहता कि हम इस बात को समझे कि हम केवल इस वर्तमान जीवन से गुजर रहें हैं और दूसरे जीवन के लिए तैयार किए जा रहे हैं। यीशु ने कहा, यदि मनुष्य मर भी जाए तो भी जीएगा (यहुन्ना ११:२५) अनन्तकाल के बारे में विचारों को आप नकार सकते हैं और उनको आने से रोक भी सकते हैं लेकिन यह अन्तर्ज्ञान की मृत्यु अन्त नहीं है नकारा नहीं जा सकता। स्वर्ग में वह ईश्वर है जिसने आप पर आस लगा रखी है, वह आपको बुलाता है कि आप उसके घर का मार्ग पा लें ‘‘तुम मुझे ढूंढोगे और पाओंगे भी, क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे।’’ (यिर्मयाह २९:१३) यीशु ने अपने चेलों से कहा:       

 

2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि होते, तो मैं तुमसे कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ।3 और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 5 थोमा ने उससे कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 6 यीशु ने उससे कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। (यहुन्ना १४:-) 

 

उसने कहा है कि वह आयेगा और विश्वासियों को अपने साथ होने के लिए ले जाएगा। क्या तुम उस पर विश्वास करते हो? क्या आपको उसके घर का मार्ग मिला है? मार्ग एक दिशा नहीं है, यह एक व्यक्ति है, स्वयं प्रभु यीशु मसीह। उसने आपके पापों का दाम चुका दिया है और आपको आमंत्रित करता है कि आप उसे अपने जीवन में अपना लें और अनन्त जीवन का मुफ्त वरदान पा लें। (इफीसियों :-) आप वह आत्मविश्वास केवल तभी पा सकते हैं कि आप घर पहुंच गए हैं जब आप प्रभु यीशु मसीह को व्यक्तिगत रीति से जान जाएंगे। क्या आपको यीशु की माँ, मरियम की एक एकलौती आज्ञा याद है? हाँ, मरियम ने संसार को एक आज्ञा दी जो बाईबिल में लिखी है। गलील के काना के विवाह में सेवकों से बात करते हुए उसने कहा, जो कुछ वह (यीशु) कहे वही करो। (यहुन्ना :) इन शब्दों में बहुत ज्ञान है और उन पर ध्यान देने से हमारे लिए भलाई होती है।           

 

यीशु ने कहा, ‘‘जिसके पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझसे प्रेम रखता है, और जो मुझसे प्रेम रखता है, उससे मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उससे प्रेम रखूंगा, और अपने आपको उस पर प्रगट करूंगा।’’ (यहुन्ना १४:२१) हम आज्ञा मानकर मसीह को दिखाते हैं कि हम उससे कितना प्यार करते हैं। यह मुख्य बात है - सारी सृष्टि के ईश्वर के साथ प्रेम करना। जब आप सचमुच में वह सब समझ जाते हैं जो मसीह ने आपके लिए किया है तो आप कुछ और नहीं बल्कि उसके साथ गहरा प्रेम करने लगते हैं। कभी-कभी जो बातें बाईबिल में स्पष्टता से लिखा हैं उसे हम देख नहीं पाते वह यह कि एक प्रेमी परमेश्वर पतित मानवता को खोज रहा है अपने आपसे मेल कराने के लिए। शुरूआत से अंत तक, उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक हम देखते हैं कि परमेश्वर अपने लिए सारे राष्ट्रो से लोगों को बुला रहा है - ऐसे लोग जो परमेश्वर को जान पाएं- केवल उसके बारे में जाने बल्कि उसको घनिष्ठता से जान पाए। चाहें आप जिस भी देश में रहते हों या चाहे आपने जो भी किया हो, मसीह ने आपके लिए मार्ग निकाला है कि आप परमेश्वर को एक नजदीकी, घनिष्ठ, प्रेम सम्बन्ध में जान सकें।

 

प्रश्न ) जब पूछा गया कि सबसे बड़ी आज्ञा क्या है, तो यीशु ने कहा, तू अपने परमेश्वर से अपने सारे हृदय, सारे मन और सारी बुद्ध से प्रेम रख। (मत्ती २२:३७) परमेश्वर से प्रेम करना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

 

कलीसिया - मसीह की दुल्हिन

 

लास्ट ऑफ मोहिकंज मेरी पंसदीदा चलचित्र में से एक है। अभिनेता दानिय्येल डे लूईस की गर्लफ्रेंड है कोरा जो कि एक युद्धरत इन्डियन जनजाति द्वारा पकड़ी जानेवाली है। उनकी एक मात्र फिर से मिलने की आशा है कि वह उसको फिलहाल छोड़ दें और कुछ समय बाद उससे और उसकी बहिन से मिल ले। दानिय्येल डे लूईस उससे कहता है, मैं तुम्हें ढूंढ लूंगा, बस जीवित रहना, चाहे जो हो जाए। चाहे जितनी भी देर लगे, चाहे जितने भी दूर हों, मैं तुम्हें ढूंढ लूंगा।’’  आप क्या समझते हैं कि रोमांस का जो भाव हमेें दिया गया है वह कहां से आया है? जाहिर है, स्वर्ग से, ब्राह्माण्ड के ईश्वर को उसके लोगों के पापों के कारण उनसे अलग कर दिया गया है। (यशायाह ४९:) वह कई हजार वर्षों से यह इच्छा रखता है कि अपने लोगों से फिर मिल जाए और उन्हें नए यरूशलेम में लाये वह उनके साथ निवास कर सके। उसकी बुलाहट क्या है?  ‘‘आदम तुम कहां हो?’’ (उत्तपति :) शत्रु को सुनने के परिणामस्वरूप, आदम और हव्वा अदन की वटिका में यहोवा परमेश्वर से छिप रहे थे। (उत्पत्ति :) आज भी बहुत सारे लोग परमेश्वर से छिप रहे है लेकिन वह उन्हें बुलाता है यह इच्छा रखते हुए कि वे प्रत्युत्तर देंगे और अपनी स्वयं की धार्मिकता को छोड़ देगें जो कि मैले-चिथड़ों के समान है और उसकी क्षमा को प्राप्त करेंगे अर्थात मसीह की धार्मिकता का वरदान। चाहे कितनी भी देर क्यों लगे, चाहे आप उससे कितने भी दूर क्यों हों, वह चाहता है कि आपको अपनी ओर खींच ले यदि आप अपना हृदय उसके प्रति खोल दें। ‘‘कोई मेरे पास नहीं सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा हैं, उसे खींच ले, और मैं उसको अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा’’ (यहुन्ना :४४) यह सच है कि आप इन शब्दों को पढ़ रहें हैं इस बात का सचमुच में एक प्रमाण है कि पिता आपको अपनी ओर बुला रहा है।          

 

वह उस भेड़ का महान चरवाहा है जो पहाड़ियों पर भटकता है उस एक भेड़ को ढूंढने के लिए जो इस बात को पहचान जाती है कि वह झुण्ड के चरवाहे से बहुत दूर चली गयी है। (लूका १५:) वह अपने लोगों को जानता है और उन्हें नाम लेकर बुलाता है। मनुष्य को यह दिखाने के लिए कि उसे पाप से अलग होने के लिए एक उद्धारकर्ता की जरूरत है वह समय के साथ कई हदों तक गया है। परमेश्वर की योजना में उसे अपने प्रिय जन के लिए प्रेम से भरी एक ऐसी चीज करने बुलाया गया था, जो शायद ही कोई कर सके। वह उनके लिए मर गया कि उन्हें पाप से मुक्त कर दें। प्रेम का यह कार्य सारे संसार में सबसे मजबूत, सबसे शक्तिशाली चीज को लेकर आता है- प्रेम की ताकत, अगापे प्रेम। इस प्रकार का प्यार आत्म-बलिदानी है और उस व्यक्ति की ओर से प्रेम का प्रत्युत्तर लाता है जो ऐसा अनुग्रह प्राप्त करता है। परमेश्वर ने अपने पुत्र को संसार में भेजा कि अपनी दुल्हिन को जीते और उसे अपने पास ला सके, विशेष कर उन्हें जो उससे बहुत दूर है।    

 

यह दिखाने के लिए कि हम कितने खास हैं, पौलूस कोरिन्थ की कलीसिया को लिखते हुए जानबूझकर फिर से जनमे विश्वासी के बारे में बात करता है कि वह स्वयं मसीह के विवाह के लिए तैयार किए जा रहे हैं।

 

            ‘‘क्योंकि मैं तुम्हारे विषय में ईश्वरीय धुन लगाए रहता हूँ, इसलिये कि मैंने एक ही पुरूष से तुम्हारी बात लगाई है, कि तुम्हें पवित्र कुंवारी की नाई मसीह को सौंप दूं’’ ( कुरिन्थियों ११:)

 

           

 

वह चाहता है कि वे घर लौट आएँ। एक पुरूष और स्त्री के बीच शादी समारोह इस बात की तस्वीर है कि मसीह में परमेश्वर ने अपनी कलीसिया, वह लोग जो उसके अपने हैं, के लिए क्या किया है। प्रेरित पौलूस उस सेवा को जो परमेश्वर ने उनको दी है इस प्रकार से देखते हैं जो कि मसीह की दुल्हिन को तैयार करते हैं ताकि वह अपने विवाह पर शुद्ध और निष्कलंक हो। चाहे आपने जो भी किया हो या चाहे आप जहां भी रहे हो दुल्हा आपको साफ कर सकता है या आपको साफ, शुद्ध और निष्कलंक कर दिया है। यदि आप मसीही हैं तो आपको शुद्धता और धार्मिकता का वस्त्र पहना दिया है जो उसने कलवरी के क्रूस पर आपके लिए खरीदा। वह अपनी दुल्हिन को घर बुला रहा है।

 

अकेले, पौलूस ही विवाह सम्बन्ध के उद्धाहरण का इस्तेमाल नहीं करते हैं। यशायाह भविष्यद्वक्ता ने भी आत्मा से प्रेरित होकर लिखा, ‘‘क्योंकि जिस प्रकार जवान पुरूष एक कुमारी को ब्याह लाता है, वैसे ही तेरे पुत्र तुझे ब्याह लेंगे, और, जैसे दुल्हा अपनी दुल्हिन के कारण हर्षित होता है, वैसे ही तेरा परमेश्वर तेरे कारण हर्षित होगा।’’ (यशायाह ६२:)

 

प्रश्न ) जब आप एक स्त्री और पुरूष के बीच में विवाह सम्बन्ध के बारे में सोचते हैं तो आप किन रीति-रिवाजों के बारे में सोचते है जो शायद परमेश्वर और उसकी कलीसिया के सम्बन्ध को दर्शाता है?      

 

पहली बात जो विवाह समारोह में इस स्वर्गीय मिलन के बारे में बताती है वह यह है कि दुल्हिन अपने माता-पिता को छोड़ देती है और नया जोड़ा आपस में एक हो जाता है। प्रेरित पौलूस दूसरी पत्री में मसीह के साथ एक होने की बात लिखता है जब वह विवाह के बारे में लिखता है:

 

‘‘32 यह भेद तो बड़ा है, पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं। 33 पर तुममें से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्नी भी अपने पति का भय माने (इफिसियों :३१-३२)       

 

पौलूस दो स्तर पर बात कर रहा है, एक पुरूष और उसकी पत्नी के सम्बन्ध के बारे में लेकिन ईश्वरीय मिलन के बारे में भी मसीह और उसकी दुल्हिन-कलीसिया के बीच में। कुछ रहस्यमयी तरीके से हमें मसीह के साथ एक जीवंत मिलन में लाए गए हैं। क्या उसने नहीं कहा, ‘‘सच्ची दाखलता मैं हूं, और मेरा पिता किसान है। ... तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुममें, जैसे डाली यदि दाखलता में बनी रहे, तो अपने आपसे नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझमें बने रहो तो नहीं फल सकते।’’ (यहुन्ना१५:,) दूसरी बात यह है कि दुल्हिन दुल्हे का पारिवारिक नाम धारण कर लेती है। हमें ‘‘मसीही’’ नाम से जाना जाता है और बाईबिल कहती है उसका नाम हमारे माथों पर लिखा हुआ होगा। (प्रकाशितवाक्य २२:) नाम मसीह के स्वरूप को दिखाता है और हमारे माथे भी हमारे विचारों, हमारी सोच को दर्शाते हैं। कभी सोचता हूँ कि उंगली पर अंगूठी किस चीज को दर्शाती है? शायद इस बात को कि अंगूठी का कोई अंत नहीं होता। एक शादी में हर एक चीज जो दुल्हे की है वह दुल्हिन की भी हो जाती है। उसी प्रकार से, स्वर्ग के संसाधन कलीसिया को दिए गए हैं जो कि मसीह की दुल्हिन हैं। हमें केवल यह जरूरत है कि हम उससे मांगे क्योंकि उसने प्रतिज्ञा की है, ‘‘और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वहीं मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।’’ (यहुन्ना १४:१३) उसने अपनी दुल्हिन को कुछ भी चीज से वंचित नहीं रखा है। बाईबिल बताती है कि उसने हमें हर वह वस्तु दी है जो जीवन के लिए जरूरी है। ( पत्रस :) दुल्हिन भी श्वेत पहनती है  जो शुद्धता के बारे में बताता है, जैसे अपने विवाह के दिन में मसीह की दुल्हिन भी अच्छा, चमकता और साफ मलमल पहनेगी।

 

            6 इन्हें अधिकार है, कि आकाश को बन्द करें, कि उनकी भविष्यद्ववाणी के दिनों में मेंह बरसे, और उन्हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृथ्वी पर हर प्रकार की विपत्ति लाएं। 7 और जब वे अपनी गवाही दे चुकेंगे, तो वह पशु जो अथाह कुण्ड में से निकलेगा, उनसे लड़कर उन्हें जीतेगा और उन्हें मार डालेगा। 8 और उनकी लोथें उस बड़े नगर के चैक में पड़ी रहेगी, जो आत्मिक रीति से सदोम और मिसर कहलाता है, जहां उनका प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था। (प्रकाशित वाक्य १९:-)

 

प्रश्न ) यदि उद्धार और अनन्तकाल पूरी तरह से वरदान है (और यह सचमुच है) तो इसका क्या अर्थ है कि दुल्हिन ने अपने आपको तैयार कर लिया है? हम अपने आपको किस प्रकार तैयार करते हैं?         

 

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप जो मसीह को जानते हैं, आपके लिए कैसा होगा कि आप सचमुच में उस क्षण में होंगे जहां आप बड़ी भीड़ के साथ परमेश्वर के लिए हाल्लिलूयाह चिल्ला रहे होंगे। कल्पना कीजिए कि विश्वास की लड़ाई खत्म हो चुकी और आप जल्द ही मेम्ने के विवाह समारोह में जाने वाले हैं। कैसे कोई परमेश्वर के साथ इस तरह का सम्बन्ध नहीं चाहेगा? आपस में मिले उन सब स्वरों का इतना बड़ा शोर था कि वह बहुत जल का सा शब्द सुनाई पड़ा, इसी प्रकार से प्रभु के छुड़ाए हुओं का आनन्द बहुत बड़ा होगा। वह कितना खुशी का दिन होगा। क्या आपको नहीं लगता कि प्रभु यीशु के चेहरे पर कितना महान आनन्द होगा जब हम उस दिन में उसकी ओर देखेंगे। वह आपकी ओर ऐसे देखेगा जैसे कि वह उस कार्य के परिणाम को निहार रहा है जो उसने क्रूस पर अपने लोगों के लिए किया। यहां मैं सी.एच. स्परगन के शब्दों को कहता हूँ।        

 

मेम्ने का विवाह पिता के अनन्त वरदान का परिणाम है। हमारा प्रभु कहता है, ‘‘वे तेरे थे और तूने उनको मुझे दिया।’’ उसकी प्रार्थना थी, पिता मेरी इच्छा यह है कि जो तूने मुझे दिए हैं वे भी वहां हो जहां मैं हूँ। ताकि वे मेरी महिमा को देखें जो तूने मुझे दी है क्योंकि संसार की नींव से पहले तूने मुझसे प्रेम किया। पिता ने चुनाव किया और चुने हुओं को अपने पुत्र को उसका भाग होने के लिए दे दिया। उनके लिए उसने छुटकारे की वाचा में प्रवेश किया जहां उससे प्रतिज्ञा ली गई कि निश्चित समय में वह उनका स्वभाव ले ले, उनके अपराधों के लिए दाम चुकाए और उनको अपना बनाने के लिए स्वतन्त्र करें। प्रिय, जो अनन्तकाल की सभाओं में तय किया गया और वहां उच्चतम दलों के बीच में निर्धारित कर लिया गया वह उस दिन में अपने बिलकुल अंत में पहुंचाया गया जब मेम्ना हमेशा के लिए अपने पास उन सबको ले लेता है जिन्हें उसके पिता ने पहले से ही उसको दे दिया है।

 

दूसरा - यह उस मँगनी का पूरा होना है जो उन दोनों के बीच अपने समय में हुई।  मैं बहुत विस्तार से फरक दिखाने की कोशिश नहीं करूंगा। लेकिन जहां तक आपकी और मेरी बात है प्रभु यीशु ने धार्मिकता में हममे से हर एक की मँगनी अपने साथ तब कर ली जब हमने पहले उस पर विश्वास किया। तब उसने हमें अपना बनाया और पहले अपने आपको हमारा होने के लिए दे दिया ताकि हम गा सकें- ‘‘मेरा प्रिय मेरा है और मैं उसका’’ यह एक विवाह का सार है। इफीसियों की पत्री में पौलूस प्रभु को इस प्रकार से दर्शाता है जैसे उनका कलीसिया से पहले ही विवाह हो चुका हो। इसको पूर्वी संस्कृति से दर्शाया जा सकता है कि जब दुल्हिन की मंगनी होती है तो सब मंगनी के समारोह में विवाह के शुद्धिकरण की सब बातें सम्मिलित होती हैं। लेकिन फिर भी काफी समय का अन्तराल होता है इससे पहले कि दुल्हिन को अपने पति के घर ले जाया जाए। वह अपने पहले घराने के साथ रहती है और अभी तक अपने रिश्तेदारों और अपने पिता के घर को नहीं भूली है जबकि वह अभी भी सच्चाई और धार्मिकता में विवाहिक सम्बन्ध में बंधी है। बाद में, वह एक निर्धारित दिन में, घर लाई जाती है, वह दिन जिसे हम वास्तविक विवाह कह सकते हैं। फिर भी पूरब वासियों के लिए मंगनी, विवाह का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

नवविवाहित जोड़े का घर       

 

मध्य-पूर्वी शादियों में, यह दूल्हे की जिम्मेदारी है कि शादी के बाद वह जोड़े के रहने के लिए स्थान तैयार करें या बनाए।            

 

आईए मिलकर हम उस स्थान को देखें जो परमेश्वर ने उनके लिए तैयार किया है जो उससे प्रेम करते हैं -   

 

1 फिर मैंने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी रहा। 2 फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 3 फिर मैंने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है, वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उनके साथ रहेगा, और उनका परमेश्वर होगा। 4 और वह उनकी आँखों से सब आंसू पोंछ डालेगा, और इसके बाद मृत्यू रहेगी, और शोक, विलाप, पीड़ा रहेगी, पहिली बातें जाती रहीं।  5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूँ, फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 6 फिर उसने मुझसे कहा, ये बातें पूरी हो गई है, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्त हूँ,मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 7 जो जय पाए, वही इन वस्तुओं का वारिस होगा, और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा। (प्रकाशित वाक्य २१:-)            

 

 

वह चाहता है कि वे घर लौट आएँ। एक पुरूष और स्त्री के बीच शादी समारोह इस बात की तस्वीर है कि मसीह में परमेश्वर ने अपनी कलीसिया, वह लोग जो उसके अपने हैं, के लिए क्या किया है। प्रेरित पौलूस उस सेवा को जो परमेश्वर ने उनको दी है इस प्रकार से देखते हैं जो कि मसीह की दुल्हिन को तैयार करते हैं ताकि वह अपने विवाह पर शुद्ध और निष्कलंक हो। चाहे आपने जो भी किया हो या चाहे आप जहां भी रहे हो दुल्हा आपको साफ कर सकता है या आपको साफ, शुद्ध और निष्कलंक कर दिया है। यदि आप मसीही हैं तो आपको शुद्धता और धार्मिकता का वस्त्र पहना दिया है जो उसने कलवरी के क्रूस पर आपके लिए खरीदा। वह अपनी दुल्हिन को घर बुला रहा है।

 

अकेले, पौलूस ही विवाह सम्बन्ध के उद्धाहरण का इस्तेमाल नहीं करते हैं। यशायाह भविष्यद्वक्ता ने भी आत्मा से प्रेरित होकर लिखा, ‘‘क्योंकि जिस प्रकार जवान पुरूष एक कुमारी को ब्याह लाता है, वैसे ही तेरे पुत्र तुझे ब्याह लेंगे, और, जैसे दुल्हा अपनी दुल्हिन के कारण हर्षित होता है, वैसे ही तेरा परमेश्वर तेरे कारण हर्षित होगा।’’ (यशायाह ६२:)

 

प्रश्न ) जब आप एक स्त्री और पुरूष के बीच में विवाह सम्बन्ध के बारे में सोचते हैं तो आप किन रीति-रिवाजों के बारे में सोचते है जो शायद परमेश्वर और उसकी कलीसिया के सम्बन्ध को दर्शाता है?      

 

पहली बात जो विवाह समारोह में इस स्वर्गीय मिलन के बारे में बताती है वह यह है कि दुल्हिन अपने माता-पिता को छोड़ देती है और नया जोड़ा आपस में एक हो जाता है। प्रेरित पौलूस दूसरी पत्री में मसीह के साथ एक होने की बात लिखता है जब वह विवाह के बारे में लिखता है:

 

‘‘32 यह भेद तो बड़ा है, पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं। 33 पर तुममें से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्नी भी अपने पति का भय माने (इफिसियों :३१-३२)       

 

पौलूस दो स्तर पर बात कर रहा है, एक पुरूष और उसकी पत्नी के सम्बन्ध के बारे में लेकिन ईश्वरीय मिलन के बारे में भी मसीह और उसकी दुल्हिन-कलीसिया के बीच में। कुछ रहस्यमयी तरीके से हमें मसीह के साथ एक जीवंत मिलन में लाए गए हैं। क्या उसने नहीं कहा, ‘‘सच्ची दाखलता मैं हूं, और मेरा पिता किसान है। ... तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुममें, जैसे डाली यदि दाखलता में बनी रहे, तो अपने आपसे नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझमें बने रहो तो नहीं फल सकते।’’ (यहुन्ना१५:,) दूसरी बात यह है कि दुल्हिन दुल्हे का पारिवारिक नाम धारण कर लेती है। हमें ‘‘मसीही’’ नाम से जाना जाता है और बाईबिल कहती है उसका नाम हमारे माथों पर लिखा हुआ होगा। (प्रकाशितवाक्य २२:) नाम मसीह के स्वरूप को दिखाता है और हमारे माथे भी हमारे विचारों, हमारी सोच को दर्शाते हैं। कभी सोचता हूँ कि उंगली पर अंगूठी किस चीज को दर्शाती है? शायद इस बात को कि अंगूठी का कोई अंत नहीं होता। एक शादी में हर एक चीज जो दुल्हे की है वह दुल्हिन की भी हो जाती है। उसी प्रकार से, स्वर्ग के संसाधन कलीसिया को दिए गए हैं जो कि मसीह की दुल्हिन हैं। हमें केवल यह जरूरत है कि हम उससे मांगे क्योंकि उसने प्रतिज्ञा की है, ‘‘और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वहीं मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।’’ (यहुन्ना १४:१३) उसने अपनी दुल्हिन को कुछ भी चीज से वंचित नहीं रखा है। बाईबिल बताती है कि उसने हमें हर वह वस्तु दी है जो जीवन के लिए जरूरी है। ( पत्रस :) दुल्हिन भी श्वेत पहनती है  जो शुद्धता के बारे में बताता है, जैसे अपने विवाह के दिन में मसीह की दुल्हिन भी अच्छा, चमकता और साफ मलमल पहनेगी।

 

            6 इन्हें अधिकार है, कि आकाश को बन्द करें, कि उनकी भविष्यद्ववाणी के दिनों में मेंह बरसे, और उन्हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृथ्वी पर हर प्रकार की विपत्ति लाएं। 7 और जब वे अपनी गवाही दे चुकेंगे, तो वह पशु जो अथाह कुण्ड में से निकलेगा, उनसे लड़कर उन्हें जीतेगा और उन्हें मार डालेगा। 8 और उनकी लोथें उस बड़े नगर के चैक में पड़ी रहेगी, जो आत्मिक रीति से सदोम और मिसर कहलाता है, जहां उनका प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था। (प्रकाशित वाक्य १९:-)

 

प्रश्न ) यदि उद्धार और अनन्तकाल पूरी तरह से वरदान है (और यह सचमुच है) तो इसका क्या अर्थ है कि दुल्हिन ने अपने आपको तैयार कर लिया है? हम अपने आपको किस प्रकार तैयार करते हैं?         

 

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप जो मसीह को जानते हैं, आपके लिए कैसा होगा कि आप सचमुच में उस क्षण में होंगे जहां आप बड़ी भीड़ के साथ परमेश्वर के लिए हाल्लिलूयाह चिल्ला रहे होंगे। कल्पना कीजिए कि विश्वास की लड़ाई खत्म हो चुकी और आप जल्द ही मेम्ने के विवाह समारोह में जाने वाले हैं। कैसे कोई परमेश्वर के साथ इस तरह का सम्बन्ध नहीं चाहेगा? आपस में मिले उन सब स्वरों का इतना बड़ा शोर था कि वह बहुत जल का सा शब्द सुनाई पड़ा, इसी प्रकार से प्रभु के छुड़ाए हुओं का आनन्द बहुत बड़ा होगा। वह कितना खुशी का दिन होगा। क्या आपको नहीं लगता कि प्रभु यीशु के चेहरे पर कितना महान आनन्द होगा जब हम उस दिन में उसकी ओर देखेंगे। वह आपकी ओर ऐसे देखेगा जैसे कि वह उस कार्य के परिणाम को निहार रहा है जो उसने क्रूस पर अपने लोगों के लिए किया। यहां मैं सी.एच. स्परगन के शब्दों को कहता हूँ।        

 

मेम्ने का विवाह पिता के अनन्त वरदान का परिणाम है। हमारा प्रभु कहता है, ‘‘वे तेरे थे और तूने उनको मुझे दिया।’’ उसकी प्रार्थना थी, पिता मेरी इच्छा यह है कि जो तूने मुझे दिए हैं वे भी वहां हो जहां मैं हूँ। ताकि वे मेरी महिमा को देखें जो तूने मुझे दी है क्योंकि संसार की नींव से पहले तूने मुझसे प्रेम किया। पिता ने चुनाव किया और चुने हुओं को अपने पुत्र को उसका भाग होने के लिए दे दिया। उनके लिए उसने छुटकारे की वाचा में प्रवेश किया जहां उससे प्रतिज्ञा ली गई कि निश्चित समय में वह उनका स्वभाव ले ले, उनके अपराधों के लिए दाम चुकाए और उनको अपना बनाने के लिए स्वतन्त्र करें। प्रिय, जो अनन्तकाल की सभाओं में तय किया गया और वहां उच्चतम दलों के बीच में निर्धारित कर लिया गया वह उस दिन में अपने बिलकुल अंत में पहुंचाया गया जब मेम्ना हमेशा के लिए अपने पास उन सबको ले लेता है जिन्हें उसके पिता ने पहले से ही उसको दे दिया है।

 

दूसरा - यह उस मँगनी का पूरा होना है जो उन दोनों के बीच अपने समय में हुई।  मैं बहुत विस्तार से फरक दिखाने की कोशिश नहीं करूंगा। लेकिन जहां तक आपकी और मेरी बात है प्रभु यीशु ने धार्मिकता में हममे से हर एक की मँगनी अपने साथ तब कर ली जब हमने पहले उस पर विश्वास किया। तब उसने हमें अपना बनाया और पहले अपने आपको हमारा होने के लिए दे दिया ताकि हम गा सकें- ‘‘मेरा प्रिय मेरा है और मैं उसका’’ यह एक विवाह का सार है। इफीसियों की पत्री में पौलूस प्रभु को इस प्रकार से दर्शाता है जैसे उनका कलीसिया से पहले ही विवाह हो चुका हो। इसको पूर्वी संस्कृति से दर्शाया जा सकता है कि जब दुल्हिन की मंगनी होती है तो सब मंगनी के समारोह में विवाह के शुद्धिकरण की सब बातें सम्मिलित होती हैं। लेकिन फिर भी काफी समय का अन्तराल होता है इससे पहले कि दुल्हिन को अपने पति के घर ले जाया जाए। वह अपने पहले घराने के साथ रहती है और अभी तक अपने रिश्तेदारों और अपने पिता के घर को नहीं भूली है जबकि वह अभी भी सच्चाई और धार्मिकता में विवाहिक सम्बन्ध में बंधी है। बाद में, वह एक निर्धारित दिन में, घर लाई जाती है, वह दिन जिसे हम वास्तविक विवाह कह सकते हैं। फिर भी पूरब वासियों के लिए मंगनी, विवाह का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

नवविवाहित जोड़े का घर       

 

मध्य-पूर्वी शादियों में, यह दूल्हे