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6. The Truth about Hell

6. नरक की सच्चाई

नरक-एक ऐसा विषय जिसे अन्देखा नही किया जा सकता

 

आज हम एक ऐसे विषय का अध्ययन करेंगें जिसे अधिकाँश पासबान अध्यापक अन्देखा कर देते हैं। सच्चाई यह है कि हम सब ही इस विषय पर बात करना भी पसन्द नही करते, यह विषय कोई और नही बल्कि नरक का ही विषय है। सी.एस. लिविस के बारे में एक कहानी प्रचलित है कि वह एक जवान प्राचारक को पाप पर परमेश्वर के न्याय के विषय पर सुन रहे थे। प्रचार के अन्त में वह प्रचारक बोला यदि तुम परमेश्वर को अपने उद्धारकर्ता के रूप में नही मानोगे तो तुम्हे अंनतकालीन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।प्रार्थना सभा के बाद लिविस ने उनसे प्रश्न किया, “क्या आप यह कहना चाहते हो कि जो व्यक्ति परमेश्वर पर विश्वास नही करता वह नरक जायेगा?” “हाँ बिल्कुल सहीप्रचारक ने उत्तर दिया। लिविस ने कहा, “अच्छा ठीक है।¹ चाहे यह हमारे लिए असुविधाजनक क्यों हो इस विषय का अध्ययन हम सब के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।    

 

कुछ तो यह भी कहेंगे, “क्यों हम इस नरक के विषय को दरकिनार कर दें?” चाल्र्स स्परजन (जो एक महान प्रचारक थे) ने कहा था, यदि हम नरक के विषय को महत्व नही देंगे तो हम क्रूस को भी महत्व नही देंगे। दुःखी और खोई हुई आत्माओं को अनदेखा करने से हम अपने उद्धारकर्ता को अनदेखा करते हैं, जिसने हमें दुखों से छुटकारा दिया है। यह कह सकते है कि कुछ लोग नरक के विषय को इसलिए अनदेखा करते हैं, क्योंकि वह मृत्यु को एक जीवन के अन्त के रूप में देखते हैं, जबकि यह तो जीवन की शुरूआत हैं। जब हम इसकी सच्चाई को समझेंगे और जानेंगे कि हमारा जीवन परमेश्वर के बिना क्या है, तभी हम समझ पायेंगे और सराहना कर पायेंगें कि परमेश्वर ने हमारे लिए क्रूस पर क्या किया।

 

जब हम यीशु के पुर्नागमन की प्रतीक्षा करते हैं तो हम सब का कर्तव्य है कि सच्चे मसीही की तरह हम लोगों को शैतान के चंगुल से बचाँए ताकि नरक में डाले जाँए। प्रत्येक व्यक्ति को परमेश्वर अत्याधिक प्रेम करता है, तथा वह यह नही चाहता कि उस व्यक्ति का विनाश हो, परन्तु परमेश्वर चाहता है कि वह प्रायश्चित करे। ( पन्नस :) परन्तु क्या होगा अगर वे ऐसा नही करतें? क्या होगा यदि उसकी मृत्यु यीशु को बिना जाने हो जाती है? क्या हो यदि वह परमेश्वर के प्रेम के संदेश सुसमाचार के प्रति प्रतिउत्तर देते? यीशु के पुर्नागमन पर वह भेड़ों (विश्वासी) को बकरियों से (अविश्वासी) से अलग करेगा और यह बताया गया है कि तब दण्ड अनंतकालीन होगा।

 

            ४१ तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे स्त्रापित लोगो, मेरे सामने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। ४२ क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया।  ४३ मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नही ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपडे़ नहीं पहिनाए; बीमार और बन्दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि ली।

 

४४ तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हमने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल की ? ४५  तब वह उन्हें उत्तर देगा, मैं तुमसे सच कहता हूँ कि तुमने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया। ४६ और यह अनन्त दण्ड भोगेंगे परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे। (मत्ती२५:४१-४६)

 

जैसे कि हम पहले भी बता चुके हैं, कि आज के समय के जीवन और मृत्यु के अनुभवों के विषय पर लोगों का अधिक रूझान है। इस विषय पर पुस्तकें आसानी से मिल जाती है। इस श्रृंखला की प्रथम श्रेणी में हमने डॉ रेयमंड . मूडी की पुस्तक ‘‘लाईफ ऑफ्टर लाईफ’’ (जीवन के बाद जीवन) के बारे में बताया था। उन्होंने एक सौ पच्चास से अधिक मृत्यु के करीब पहुंचने वाले व्यक्तियों के अनुभवों पर शोध कार्य किए। इसी प्रकार एक और डॉक्टर, डॉ. मौरिस रॉलिंग्स ने अपनी पुस्तक ‘‘टू हेल एण्ड बैक’’ (नरक तक और वापस) जिससे उन्होंने भी मृत्यु के करीब पहुंचने वाले लोगों के अनुभव लिखे, बताया कि लोगों ने ऐसे में नरक का अनुभव किया पर कुछ समय तक ही उन्हें वह याद रहा। उन्होंने यह भी कहा कि, वह सत्य है कि मनुष्य वह ही याद रखता है जो अच्छा है वरन वह बाकी सब जो बुरा है भूल जाता है और इसलिए यदि ऐसे व्यक्तियों का अनुभव जानने के लिए उनका साक्षात्कार देर से लिया जाए (दिन, हफ्ते, या महीने के बाद), तब उनको केवल सकारात्मक अनुभव ही याद रहते हैं।

 

डॉ. रालिंगस ने एक व्यक्ति का अनुभव बताया है जिसके हृदय में पेसमेकर शल्य क्रिया द्वारा लगाया गया था। उस व्यक्ति ने डॉ. रालिंगस को बताया कि उसने नरक को देखा ही नहीं बल्कि अनुभव भी किया। उसने एक लम्बी सुरंग देखी जो रौशनी की तरफ खुल रही थी, परन्तु फिर उस सुरंग में आग लग गयी। उस व्यक्ति को ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह तेजी से उस आग के तालाब की ओर बढ़ रहा है, मानों जैसे स्वयं ही घी और आग की ज्वाला तेजी से उसकी ओर बढ़ रही है। उस व्यक्ति ने गहरी लम्बी परछाइयां भी देखीं जो आगे-पीेछे घूम रही थीं, मानों जैसे बन्द पिंजरे में जंगली जानवर घूमते हैं। वह व्यक्ति जोर से चिल्लाया यीशु ही परमेश्वर है’’ और फिर अचानक वह अपने शरीर में वापस लौट आया। इसी प्रकार डॉ. रौलिंगस ने एक और वाक्या बताया, डॉक्टर उस व्यक्ति को सी.पी.आर. दे रहे थे, उसको भी पेसमेकर लगा था और वह व्यक्ति बार-बार होश में आता और फिर बेहोश हो जाता। जब वह होश में आता तो वह डॉ. रौलिंगस से चिल्ला-चिल्लाकर आग्रह करता कि वह उसके लिए परमेश्वर से प्रार्थना करें क्योंकि वह नरक में है। डॉ रौलिंगस उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना नहीं करना चाहते थे क्योंकि वह तब तक स्वयं भी विश्वासी नहीं थे। परन्तु वह उस व्यक्ति की व्यथा को देखकर अंततः उन्होंने उसके लिए एक प्रार्थना की।

 

उन्होंने प्रभु यीशु से कहा कि वह इस व्यक्ति को नरक के द्वार से दूर रखें। और वह व्यक्ति उसी क्षण शान्त हो गया। वह व्यक्ति अब पागलों की तरह नहीं चिल्ला रहा था। डॉ. रौलिंगस कहते हैं कि उनके इस अनुभव ने उनके जीवन पर अत्याधिक प्रभाव डाला और उन्होंने अपना जीवन यीशु को दे दिया। डॉ. रालिंग्स कोई शास्त्री या प्रचारक नहीं है बल्कि वह एक डाक्टर है, जिन्होंने अपने अनुभव लिखे हैं, कि किस प्रकार उनहोंने अपने मरीज को पुनर्जीवित किया।

 

बहुत से लोग यह दावा करते हैं कि उन्होंने मृत्यु को नजदीक से देखा और अनुभव किया है, किन्तु यह कितना सत्य है, इसका कोई प्रमाण नहीं है। यह माना जा सकता है, कि यदि ईश्वर ने पौलूस को तीसरे स्वर्ग तक जाने की अनुमति दी थी, और यदि इस्तिफनुस ने यीशु को अपनी मृत्यु से ठीक पहले परमेश्वर के दायने हाथ खड़े देखा, तो यह सत्य है कि आज के युग में भी बहुत से ऐसे लोग होंगे, जिन्हे परमेश्वर ने मृत्यु के पश्चात के जीवन की एक झलक देखने की अनुमति दी होगी।            

 

परन्तु हमारा विश्वास लोगों के अनुभव पर नहीं वरन परमेश्वर के वचन पर आधारित होना चाहिए क्योंकि ऐसे भी लोग हैं, जो यह विश्वास करते हैं कि प्रत्येक जन चाहे जैसा भी जीवन जीने वाला हो उसका शान्ति और प्रकाश से भरे हुए अनन्त जीवन में स्वागत किया जाता है। परन्तु यह सब वचन के अनुसार मान्य नहीं है।² प्रभु यीशु प्रेम और सत्य का रूप है, उन्होंने अपने शिष्यों से कुछ भी नहीं छिपाया।

 

परमेश्वर अकसर नरक के बारे में बातें करते थे तथा उनके बहुत से दृष्टान्त स्वर्ग, नरक, अन्तिम न्याय तथा अनन्त पुरूस्कार पर आधारित हैं। यदि यीशु के लिए यह विषय महत्वपूर्ण था, कि वह अपने शिष्यों को इन सबका ज्ञान दें तो यह सही होगा कि हम भी इन तथ्यों पर गहन विचार करें और गम्भीरता से स्वर्ग तथा नरक के विषय पर ध्यान दें। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि शैतान धोका देता है, वह झूठ का पिता है तथा उसको प्रकाश का स्वर्गदूत भी कहा जाता है। कुछ कहानियां ऐसी हो सकती है जिसमें परमेश्वर को महिमानवित किया जाता है और वह सत्य भी हो सकती है। परन्तु हमारा विश्वास केवल परमेश्वर पर और उसके वचन पर होना चाहिए, कहानियों पर नहीं। यह माना जा सकता है कि शैतान सच्चाई को छिपाकर अथवा बदलकर यह जताना चाहता है कि सभी रास्ते जो परमेश्वर को महिमानवित करते हैं, वह अन्त में परमेश्वर तक पहुंच पाते हैं।

 

क्या मृत्यु विनाश की दशा है?

 

कुछ लोगों के अनुसार नरक वह स्थान है, जहां उन लोगों का विनाश किया जाता है, जो प्रभु यीशु के द्वारा दी गयी मुफ्त क्षमा को स्वीकार नहीं करते। विनाश का सही अर्थ है, ‘‘पूर्णतः समाप्त हो जाना अथवा बर्बाद हो जाना।’’ प्रभु यीशु ने वचन में युनानी भाषा का शब्द एइनोइस का दो बार प्रयोग किया जब वह अपने शिष्यों के आनन्द को व्यक्त कर रहे थे। जिसका अर्थ है, ‘‘अनन्त, लगातार। जब अनन्त जीवन की बात करते हैं, तो उसका अर्थ है एक ऐसा जीवन जो परमेश्वर के जीवन को दर्शाता है, जिससे समय की प्रतिबंद्धता नहीं है।२ परन्तु यह विनाश जैसा नहीं है। प्रभू यीशु ने यह स्पष्ट सिखाया है कि यदि कोई व्यक्ति वचन को नकारता है और पाप के जीवन में जीता है, तो वह अपने जीवन के अन्त में अनन्त दण्ड का भोगी होगा।

 

स्वेतलाना स्तालिन, जोसेफ स्तालिन की पुत्री (जो १९२२ से १९५३ तक रूस के अगवा थे) ने जब अपने पिता के साथ उनके जीवन के अंतिम पलों को बिताया तब उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि वह अब किसी भी अविश्वासी के साथ उनके अन्त समय में साथ नहीं रहेगी। उन्होंने बताया कि उनके पिता नरक में चीखते-चिल्लाते हुए गये। ‘‘जीवते परमेश्वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है।’’ (इब्रानियों १०:३१)

 

 कहते है कि बोल्यैर की मृत्यु अत्यन्त दर्दनाक थी, इसी तरह फ्राँस राजा चाल्र्स , डेविड हुए तथा थाॅमस पेन की भी मृत्यु अत्यन्त दर्दनाक थी। सी. एम. वाॅर्ड उन लोगों के लिए कहते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं’’ कोई भी विश्वासी आज तक, अपनी मृत्यु शैय्या पर (परमेश्वर के प्रेम से) फिरे नहीं है।

 

) प्रेमी परमेश्वर क्यों किसी मनुष्य को नरक में भेजेगा? किसी व्यक्ति को कितना बुरा होना होगा कि वह नरक में भेजा जाए? क्या कोई ऐसी रेखा निश्चित है जिसे किसी व्यक्ति को पार करना होगा?

 

१६ क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। १७ परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। १८ जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नही करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वा नहीं किया। (यहुत्रा :१६-१८)

 

सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने उद्धार का मार्ग बनाया है, और सभी मनुष्य एक नाँव में सवार हैं, क्योंकि हम में से <