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5. The Parable of The Hidden Treasure 

5. छिपे हुए खज़ाने और मोती का दृश्टान्त

शुरुआती प्रश्न: अभी आप जो सब जानते हैं उसे ध्यान में रखते हुए, अगर आप को रोकने के लिए कोई बाधा नहीं हो, और आप के लिए असीमित संसाधन उपलब्ध हों, तो आप किस व्यवसाय में प्रवेश करना चुनेंगे और क्यों?

 

44स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाकर छिपा दिया, और मारे आनन्द के जाकर और अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया। 45फिर स्वर्ग का राज्य एक व्यापारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में था। 46जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला तो उसने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया। (मत्ती 13:44-46)

 

इन दोनों दृष्टान्तों में जिन्हें हम आज देख रहे हैं, हम उन दो लोगों के बारे में पढ़ते हैं जो महान मूल्य की वस्तु पाते हैं और यह कि वो खजाने और मोती के अपने स्वामित्व को सुरक्षित करने के लिए क्या करते हैं। पहला व्यक्ति अप्रत्याशित रूप से खज़ाने तक पहुँच जाता है; जबकि दूसरा व्यक्ति मोती की इच्छा रखता था और उसे खोज रहा था। दोनों दृष्टान्तों में, स्वर्ग के राज्य के साथ तुलना की गई है। इस अध्ययन का इरादा सिर्फ इसपर केन्द्रित होना नहीं है कि स्वर्ग का राज्य क्या है, क्योंकि यह तो अपने आप में ही एक विशाल विषय है; यह कहना पर्याप्त है कि परमेश्वर या स्वर्ग का राज्य (वचन में यह नाम एक दूसरे के समानार्थक शब्द हैं) परमेश्वर का शासन और हुकूमत है। जब एक व्यक्ति को स्वर्ग के राज्य में लाया जाता है, तो उसे क्रूस पर मसीह के सम्पूर्ण किये गए कार्य के द्वारा परमेश्वर के साथ सही संबंध में लाया जाता है। आइये, पहले एक खेत में छिपे खज़ाने के बारे में देखें।

 

खेत में छिपा हुआ खजाना

 

सबसे पहले, मैं चाहता हूँ कि आप कल्पना करें कि दबे हुए खजाने को अनायास पा लेना कैसा होगा। यह एक ऐसी बात है जो हम साहसिक अभियान पर जाने वाले लोगों या खोजकर्ताओं के साथ होने की कल्पना करते हैं, लेकिन यह सामान्य लोगों के साथ हुआ है जो बिना इसकी उम्मीद करे अपने रोज़मर्रा के कार्य कर रहे थे। वे खज़ाने की तलाश में नहीं थे।

 

27 सितंबर 2013 को, एक फ्रांसीसी पर्वतारोही को जो माउंट ब्लैंक से ग्लेशियर पर चढ़ाई कर रहा था, पन्ने, माणिक और नीलमणि का खज़ाना मिला जो दशकों से दफ़न था। ऐसा माना जाता है कि इस गहने के बक्से की कुल कीमत 356,435 अमेरिकी डॉलर होगी और यह एक भारतीय विमान में था जो 1966 में इस क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस पर्वतारोही ने स्थानीय पुलिस को इसे सौंप दिया। "यह एक ईमानदार नौजवान था जिसे बहुत जल्द यह एहसास हो गया था कि वे ग्लेशियर में मृत हुए किसी व्यक्ति के थे," स्थानीय पुलिस प्रमुख सिल्वेन मर्ली ने कहा। "वह उन्हें रख सकता था, लेकिन उसने उन्हें पुलिस को देना पसंद किया," मर्ली ने कहा, यह जोड़ते हुए कि पर्वतारोही ने अनायास बक्सा पाया और कि कुछ अनमोल पत्थरों की पन्नियों परभारत में निर्मितकी छाप थी। फ्रांसीसी अधिकारी उन जवाहरात के मालिकों या वारिसों का पता लगाने के लिए अपने भारतीय समकक्षों से संपर्क कर रहे हैं। फ्रांसीसी कानून के तहत, अगर इनकी पहचान नहीं हो पाती है, तो गहने पर्वतारोही को सौंप दिया जा सकते हैं, मर्ली ने कहा।

 

कभी-कभी, हम लोगों के अनायास दफन खज़ाने को पाने के बारे में सुनते हैं, जैसे हम इस खंड में पढ़ रहे हैं। इंग्लैंड के पूर्वी तट के समुद्रतल की गहराई तक मछली पकड़ने वाला मछुवारा होते हुए यह हमेशा से मेरा सपना रहा था कि एक दिन मेरा सामना विषम रेतीले टीले पर डूबे किसे ऐसे जहाज़ से होगा जिसमें सोना रखा हो। मैंने स्पैनिश अरमाडा जहाज़ो के बारे में खोज-बीन की थी, सोने से लदा वो जहाज़ जो हमारे तट के आस-पास कहीं डूब गया था, और एचएमएस विक्ट्री (नेल्सन के ध्वज-पोत से पहले), जो हमारे तट के किनारे कहीं वहाँ जहाँ मैं मछली पकड़ता था, 100,000 पुर्तगाली स्वर्ण के सिक्कों के साथ डूबा था। यदि मुझे खज़ाने के साथ इनमें से कोई भी जहाज़ मिल जाता, तो यह उस आत्मिक खज़ाने की तुलना में कुछ भी नहीं होगा जो मुझे मसीह में मिला है। खज़ाने से भरे पूरे संसार की तुलना में मसीह का धन बहुत अधिक मूल्यवान है।

 

उन दिनों में जब नया नियम लिखा गया था, उस समय कोई बैंक नहीं होते थे, जहाँ एक व्यक्ति अपने खज़ाने को यहूदिया और सामरिया से आने वाली कई लुटेरी सेनाओं से सुरक्षित रख सकता था। क्योंकि यह उन्हें रखने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान था, लोग जमीन में अपना कीमती सामान छिपाते थे। फिलिस्तीन में कई युद्ध हुए थे, और लोगों को कभी-कभी युद्ध के समय में अपने खजाने को इस आशा के साथ छोड़ना पड़ता था, कि लड़ाई समाप्त होने के बाद, वे इसे लेने वापस सकते हैं। कभी-कभी, लोग मारे जाते थे, और अन्य समयों पर उन्हें दूर के देश में भेज दिया जाता था, उदहारण के लिए जैसे कि अश्शूर और बाबुल में उनका भेजा जाना और तितर-बितर होना, और वे अपने क़ीमती सामान पुन: प्राप्त नहीं कर सकते थे। छिपे हुए खज़ाने के दृष्टान्त में ऐसा प्रतीत होता है कि वह व्यक्ति अमीर नहीं था, क्योंकि वह अपनी खोज पर बहुत उत्साह और आनन्द से भर गया था (मत्ती 13:44)

 

यहाँ तस्वीर संभवतः ज़मीन के एक टुकड़े पर मालिक के लिए हल चलाने के लिए लाए गए एक मजदूर की है। जब वह जुताई कर रहा था, तब खजाने का पता चला। जब उसने खज़ाने पर गौर किया, तो उसने अपनी खोज के मूल्य का एहसास किया और फैसला लिया कि वह इसे फिर से भूमि में छिपाएगा। प्राचीन रब्बिनी कानून में कहा गया था कि अगर किसी कर्मचारी को इस तरह की परिस्थिति में खज़ाना मिलता है, तो कानूनी उस खेत का स्वामित्व रखने वाला उस खज़ाने का स्वामी होगा। वह इसे चोरी कर पड़ोसी देश में बेच सकता था। खेत के स्वामी को तो पता भी नहीं चलता, लेकिन उसने अपनी सारी चीजों को बेचने का निर्णय लिया, और जब उसे पर्याप्त पैसा मिला, तब उसने खेत के स्वामी से उसे खरीद लिया।

 

क्या उस व्यक्ति ने अनैतिक कार्य किया क्यों या क्यों नहीं? दृष्टान्त का मुख्य मुद्दा क्या है?

 

इस दृष्टांत की दो व्याख्याएं हैं। पहली व्याख्या, कुछ लोग कहेंगे कि मसीह परमेश्वर का मज़दूर है जो खेतों में श्रम करने के लिए आया है और उसने अपना खजाना, कलीसिया, पा लिया है और उसने अपना सभी कुछ को दे दिया है ताकि वह खेत खरीदे अपने स्वयं के लहू से कलीसिया को अपने लिए मोल ले सके। कुछ बाइबल विद्वानों ने इस दृष्टिकोण को रखा है, और यह व्याख्या संभवत: पृथक है।

 

हालांकि, एक और तरीका है जिससे इस दृष्टान्त के अर्थ की व्याख्या की जा सकता है। दोनों दृष्टान्तों में मैं इस व्याख्या का समर्थन करता हूँ। दूसरी व्याख्या में, स्वयं मसीह खजाना है। कुछ ऐसे लोग जो उसे खोज नहीं रहे थे, लेकिन किसी तरह से, उन्होंने उस विश्व रुपी खेत में जहाँ यह नज़रों से छिपा हुआ था, मसीह की सच्चाई पाई। कुछ लोग इसमें कोई मूल्य नहीं देखते। वे केवल खेत देखते हैं, लेकिन वे सतह की चीज़ों से नीचे, छिपे हुए खजाने को नहीं देखते। वह लोग जो इसमें थोड़ा मूल्य देखते हैं, वे केवल इस संसार के परिदृश्य से चीजों को देखते हैं। उनके लिए परमेश्वर की चीज़ें मूर्खता हैं (1 कुरिन्थियों 2:14) दूसरों को अनन्तकाल की बातों में महान मूल्य दिखता है, और वे अनदेखे संसार की चीजें थामे रहने के लिए इस अस्थायी दुनिया की चीजों के साथ उसे अदल-बदल कर लेते हैं। प्रेरित पौलुस की गवाही ऐसी ही थी:

 

वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूँ: जिसके कारण मैंने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूँ, जिससे मैं मसीह को प्राप्त करूँ। (फिलिपियों 3:8)

 

मुझे यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि परमेश्वर के साथ एक सम्बन्ध "खरीदा” नहीं जा सकता। ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे हम अपने प्रयासों और संसाधनों से धार्मिकता को खरीद सकते हैं। मेरा मानना ​​है कि इस खंड में ज़ोर उस मूल्य के बारे में है जो वो व्यक्ति इस खज़ाने को देता है और यह निर्णय है कि वह इसे हर कीमत पर हासिल करे। इस दृष्टान्त में, सभी दृष्टान्तों की तरह ही, विवरणों पर बल नहीं दिया जाना चाहिए। हमें कहानी की मुख्य बिंदु को थामना है। बाकी सब कुछ उस बिंदु के अधीन है। जब हम कोई खरीदारी करते हैं तो क्या होता है? एक चीज को दूसरे के लिए बदल लिया जाता है। इस मामले में, हमारे टूटे जीवन उसके अनन्त जीवन के लिए। “आओ सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।” (यशायाह 55:1) जब हम कुछ खरीदते हैं, तब हम किसी ऐसी चीज़ को पाने के लिए जिसे हम अधिक मूल्यवान मानते हैं, किसी वस्तु या कीमती चीज़ को बदले में दे देते हैं। हमें सब कुछ बेचने और अपने प्राणों को प्रभु यीशु पर केंद्रित करने में उस महान बहुमूल्यता को देखना होगा कि हम प्राप्त कर सकें “पूरी समझ का सारा धन प्राप्त करें, और परमेश्वर पिता के भेद को अर्थात् मसीह को पहचान लें। जिसमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्डार छिपे हुए हैं।” (कुलुस्सियों 2:2-3) प्रेरित पौलुस की तरह ही, परमेश्वर हमारे साथ भी इस संसार की बातों पर हमारी पकड़ को ढीला करना चाहेगा ताकि हम मसीह को प्राप्त कर सकें। इस दृष्टान्त में आदमी ने सब कुछ बेच दिया था ताकि वह इस खेत को खरीद सके।

 

 

एक दिन, आपको इस दुनिया को छोड़ना होगा, और यदि जीवन में आपका ध्यान छिपे खजाने के बजाय सिर्फ इस दुनिया के खेत पर ही है, तो आपके अंतिम शब्द क्या होंगे? प्रसिद्ध फ्रांसीसी आत्मज्ञानी दार्शनिक वोल्टेयर ने मरने से बिलकुल पहले कहा, “परमेश्वर के नाम पर, कृपया मुझे शांति से मरने दीजिए”। एलिज़ाबेथ 1, इंग्लैंड की रानी के आखिरी शब्दों पर भी विचार करें, जिन्होंने कहा था, "एक पल के लिए मेरी सारी संपत्ति।" हमें अपनी ज़िंदगी को आने वाले जीवन को ध्यान में रखते हुए जीना चाहिए। याद रखें, इस पृथ्वी पर हमारा जीवन इस स्तर पर हमारे अस्तित्व से परे आने वाले वास्तविक जीवन की मात्र छाया है। अगर हम मसीह के व्यक्ति को ग्रहण करें, तो परमेश्वर हमें अपने खज़ाने की पेशकश करता है। उसके साथ, हमें सब कुछ मिलता है। “जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा? (रोमियों 8:32) बहुत से लोग जो उद्धारकर्ता की बात करने वाले शब्दों से सामना करते हैं, बाद में पछतावा करेंगे कि उन्होंने इस वचन की सच्चाई को पकड़ क्यों नहीं लिया। मसीह का यह सुसमाचार संसार के खेत में छिपा हुआ है, लेकिन लोग दिन प्रतिदिन, बिना इस बात पर ध्यान कर कि वे इस संसार से होते हुए कहाँ जा रहे हैं, अपने खेतों में हल चलाते रहते हैं।

इस दृष्टान्त में यह आदमी बाहर निकला और उसने दूसरी चीजों पर अपनी पकड़ जाने दी ताकि वह खज़ाने को पूरी तरह से समेट सके। इस संसार की बातों पर हमारी पकड़ को छोड़ने के लिए, हमें अपने आप को प्रभु के लिए पवित्र या अलग करना है “शान्ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे(1 थिस्सलुनीकियों 5:23)अंग्रेजी शब्द अलग किया जाना का इब्रानी शब्द, मैले' (מלא - स्ट्रॉन्ग कॉनकॉर्डन्स का 04390) और याद (יד- स्ट्रॉन्ग के 03027) से अनुवाद किया गया है। इसका शाब्दिक अर्थ है भरे हाथ होना। सोच यह है कि हम स्वयं को सृष्टिकर्ता परमेश्वर को इस रीती से सौंप दें कि हमारे हाथ अन्य चीज़ों से खाली हैं ताकि हम परमेश्वर से परिपूर्ण हो सकें। यह संभव है कि हम कुछ चीज़ों को इतनी मज़बूत पकड़ से थामे रहें कि हम उन चीज़ों को प्राप्त नहीं सकते जो परमेश्वर हमें देगा। हमारे हाथ सभी प्रकार की चीज़ों से भरे हो सकते हैं। हम सोच सकते हैं कि वे चीज़ें हमारे स्वामित्व में हैं; हालांकि, कभी-कभी वे हमारा स्वामित्व करती हैं! यहाँ तक ​​कि करने और नहीं करने की सतर्क प्रणाली के साथ मनुष्य द्वारा बनाए धर्म भी एक व्यक्ति को मसीह में सच्चाई को पकड़ने से अलग कर सकते हैं। किसी भी ऐसी चीज़ से छुटकारा पाएं जो आपको अनन्त खज़ाने को पकड़ने से रोकती हैं। अपना हाथ खोलें ताकि वह उन्हें भर सके। आइये अब दूसरे दृष्टान्त पर एक नज़र डालें।

 

अनमोल मोती का दृष्टान्त

 

45फिर स्वर्ग का राज्य एक व्यापारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में था। 46जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला तो उसने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया। (मत्ती 13:45-46)

 

यीशु एक व्यापारी की उपमा को क्यों चुनता है? एक व्यापारी क्या करता है?

 

आइए कमाई करने के तरीकों के लिए लोगों के जीवन के बारे में सोचें। सप्ताह के अंत में वेतन पाने के लिए लोग समय और ऊर्जा का लेन-देन करते हैं। फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड ने कार का आविष्कार नहीं किया; वह कार के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तकनीक समनुक्रम की खोज के लिए प्रसिद्ध है। जब उनकी तकनीक में कुछ खराबी आ गई, वो उन्होंने उत्पादन फिर से शुरू करने के लिए एक इंजीनियर को बुलाया जो उसे ठीक करना जानता था। वह व्यक्ति आया, और दस मिनट की छेड़-छाड़ करने के बाद, उसने समस्या हल कर दी और हेनरी फोर्ड को 10,000 अमरीकी डॉलर का बिल दे दिया। जब फोर्ड ने ऐतराज़ जताया कि दस मिनट के काम के बिल की राशि इतनी अधिक क्यों है, तो उस व्यक्ति ने बिल को संयंत्र से छेड़-छाड़ करने के लिए दस डॉलर और यह सीखने के लिए कि कहाँ छेड़-छाड़ करनी है 9,900 डॉलर के लिए संशोधित कर दिया।

 

कुछ लोग पैसे के बदले किसी कौशल को या व्यापारिक ज्ञान को सीखने में कई साल लगा देते हैं। एक व्यापारी भी ऐसा ही करता है। वह पैसे के लिए ज्ञान का कारोबार करता है। धन प्राप्त करने के लिए वह अपनी कड़ी मेहनत के पसीने या व्यापारिक समय का पसीने बहाने पर निर्भर नहीं रहता। वह जिस भी वस्तु का व्यापार कर रहा है, उसके ज्ञान पर निर्भर रहता है, और इस मामले में, उस मोती के विषय में उसे ज्ञान है। एक व्यक्ति अपनी कड़ी मेहनत के पसीने से उस स्थान को हासिल कर या धर्म के विषय में ज्ञान से भी परमेश्वर के राज्य में नहीं आता। यह एक व्यक्ति, मसीह के व्यक्ति को जानने के द्वारा होता है। जो आप जानते हैं वह आपको धर्मी नहीं ठहराता। ऐसा इसपर निर्भर है कि आप किसे जानते हैं: अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।” (यशायाह 53:11)

 

व्यापारी खोजने निकलता है

 

व्यापारी, जो आपकी और मेरी एक तस्वीर है, चार चीजें करते हुए आगे बढ़ता है। पहले, वह खोजता है, फिर वह पाता है, फिर वह अपनी सारी चीजों को बेचता है और जो उसने पाया है उसे मोल ले लेता है। हर किसी की कहानी अनोखी है, लेकिन आध्यात्मिकता की मेरी तलाश में, मैं अनायास परमेश्वर की सच्चाई तक नहीं पहुँचा। मैं एक खोजी था। मेरे जीवन में एक समय ऐसा आया जब परमेश्वर ने जीवन के बारे में मेरे कई प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए मेरे अंदर एक इच्छा दी। इनमें से कुछ प्रश्न निकट-मृत्यु के अनुभव और मछली पकड़ने के दौरान ऐसी कई घटनाओं के बाद मेरे भीतर उठे थे, जिन की वजह से मैं, परमेश्वर के अनुग्रह के बिना, आसानी से अपना जीवन खो सकता था। मैंने सच्चाई की तलाश में तीस विभिन्न देशों में यात्रा की। मैंने बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया, और अंत में मैंने सुसमाचार का संदेश सुना। जब मुझे अनमोल मोती मिला, तो मैंने तुरंत प्रतिउत्तर दिया। जब कोई सुसमाचार द्वारा मसीह यीशु में परमेश्वर के अनुग्रह और करुणा को सुनता है, तो उसमें सच्चाई साफ़ नज़र आती है।

 

यदि आप एक खोजी हैं, तो मैं सुझाव दूँगा कि आप मोती पर गंभीरता से गौर करें और इस की सच्चाई के बारे में छान-बीन करें कि परमेश्वर ने आपके लिए क्या किया है। मोती की खोज करने वाला व्यक्ति एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर है जो सत्य पर अनायास नहीं पहुँचता; वह चिंतन करने के द्वारा सक्रिय रूप से अपनी खोज में जुटा है। कुछ लोग सोचना नहीं चाहते। सोचना मुश्किल कार्य है। जबकि कोई मेहनत से खोजता है, तो इसमें समय लगाना और केन्द्रित होना पड़ता है। हमारे प्राणों का शत्रु (शैतान) हमें परमेश्वर की वस्तुओं के प्रति निन्द्र्मग्न रखने के लिए हर तरह की छोटी और महत्वहीन चीजों में विचलित होने में व्यस्त रखता है। इस महान मूल्य के मोती (यीशु) को ढूँढ़ने के प्रयास की तुलना में आपके लिए और कुछ अधिक महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए।

 

एक व्यापारी जिसके जीवन का केंद्र मोती थे, मोतियों को पाने के लिए कहीं भी यात्रा करता। वह समुद्र तट के किनारे यात्रा कर, मोती के खोजी गोताखोरों और मछुआरों से पूछता होता, "क्या आपके पास कोई मोती हैं?" यह उसके जीवन का उद्देश्य था। उसके जीवन का एक उद्देश्य और लक्ष्य था। इस व्यापारी को मोती खोजने थे। उसके जीवन की ऊर्जा उसमें लगाई गई थी।

 

मुझे लगता है कि सुख-विलास का पीछा करने का जुनून हमारे समाज के लिए एक खतरा है। हमारी संस्कृति इसमें डूबी हुई है। इतिहासकार हमें बताते हैं कि रोमी साम्राज्य के पतन से पूर्व सुख-विलास का पीछा करना प्राचीन रोम की एक विशेषताओं में से एक था। आज, हमें इस बात पर विचार करना है कि हम भी उसी दिशा में बढ़ रहे हैं। हमारा समाज और हमारी पश्चिमी संस्कृति मनोरंजन को एक बड़ी प्राथमिकता देती है और हमारे मनोरंजन करने वालों को वह सम्मान का स्थान देती है, जो किसी भी अन्य समूह से कहीं अधिक है। उन विभिन्न पुरस्कार समारोहों की संख्या के बारे में सोचिए जो पूरी तरह मनोरंजन उद्योग के प्रति समर्पित हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह सब कुछ भी हमारे लिए पर्याप्त नहीं!

 

मुझे नहीं लगता कि मनोरंजन का आनंद लेना गलत है, और वास्तव में, हमसे अनन्तकाल की चीज़ों के बारे में बात करने के लिए परमेश्वर कला का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, हमें इस बारे में पूरी तरह से अवगत होने की आवश्यकता है कि मीडिया (संचार माध्यम) किस प्रकार हमारी चेतना को निष्क्रिय कर देता है। मैं अपने जीवन को पूर्णत: जागरूक रहकर जीना चाहता हूँ! आज, क्योंकि हमें कल्पना की दुनिया के द्वारा बहलाया जा रहा है, हमारे लिए सो जाना बहुत आसान है। आज, मैं लोगों के बीच जागृति को देखने के लिए उत्सुक हूँ, खासकर युवा लोगों के बीच।

 

10उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो। 11यहोवा और उसकी सामर्थ की खोज करो; उसके दर्शन के लिए लगातार खोज करो। (1 इतिहास 16:10-11)

 

इस व्यक्ति ने एक अच्छा मोती पाने पर उसे पहचानने के कौशल को विकसित करने के लिए समय और चिंतन किया था। परमेश्वर की बातें अध्मनें लोगों तक नहीं पहुँचती, लेकिन उन तक जो प्रभु के खोजी और उसके पीछे जाने की इच्छा रखते हैं। इसका क्या मतलब है? आप जिस को खोजते हैं, उस पर ही ध्यान देते हैं। हम परमेश्वर को सोच में, प्रार्थना में, अपने हृदयों को उसकी ओर मोड़ने में, अपनी इच्छा को उसके अधीन करने में, और उसके वचन पर ध्यान देने में खोजते हैं। फिर से, यह सब एक सवाल पर आ के टिक जाता है, आप किसे मूल्यवान समझते हैं?

 

हम उसकी तलाश करते हैं जिसे हम बहुमूल्य समझते हैं। प्रत्येक व्यक्ति के पास इस बारे में अपनी सोच है कि उनके लिए क्या मूल्यवान है। यही कारण है कि यीशु कहता है “क्योंकि जहाँ तेरा धन है वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा।” (मत्ती 6:21) जब व्यापारी को मोती मिल गया, तो उसकी खोज पूरी हो गई थी। जब कोई मसीह को पा लेता है, तो वह उसका राज्य पाता है। वह सब कुछ पा लेता है। यह खोज सार्वभौमिक है। सभी लोगों की एक ही जरूरत है और सभी उन्ही चीजों की लालसा रखते हैं। वह मोती (बहुवचन) जिनकी इच्छा व्यापारी को थी शायद इस खोज का प्रतीक है। वह निश्चित उनमें से बहुतों को खरीदने की उम्मीद कर रहा था।

व्यापारी बहुमूल्य मोती पाता है

जब वह व्यक्ति खोज रहा है, तब वह एक बहुत बड़े मोती तक पहुँचता है जो पहले कभी खरीदे किसी भी मोती से अधिक अनमोल था। व्यापारी अपनी खोज से आश्चर्यचकित था! वह अपने अच्छे भाग्य पर विश्वास कर ही नहीं पा रहा था, क्योंकि यह असाधारण मोती उस सब से जो कुछ भी उसने कभी देखा था बिलकुल अलग था। इसकी सुंदरता लुभावना थी। यह एक सच्चाई है कि जब कोई अच्छी चीजों की खोज में मेहनत करता है, तो परमेश्वर मार्ग में उसे मिलेंगे। जब हम उस मार्ग पर होते हैं, तो हम उस मार्ग पर परमेश्वर से मिलेंगे। अपने आप को "मार्ग में" रख लीजिये और अपने सारे हृदय से उसकी खोज करें। वह सभी जो मनोरम और शुद्ध चरित्र का है प्रभु यीशु मसीह में पाया जाता है।

 

हम अनमोल मोती के मूल्य को नहीं जानते, लेकिन व्यापारी यह जानता था कि यह उसके जीवन भर का सबसे बड़ा सौदा था, और उसे पता था कि इस मोती के लिए उसे बहुत कीमत चुकानी पड़ेगी। वह बैठ गया और सोचने लगा कि उसे क्या कुछ देना पड़ेगा। उसके पास और मोती खरीदने के लिए कोई पूंजी नहीं रह जाएगी। केवल ऐसा करना ही उसके जीवन में बहुत सी चीजों को बदल देगा। जब मैं कई देशों से होते हुए अपने प्राण के भीतर आराम की तलाश में था, तो मुझे अनमोल मोती मिला, और मैंने अपने आप को सम्पूर्णता से उसे दे दिया। फलस्वरूप, मैंने अपने प्राण के लिए एक अद्भुत आंतरिक शांति प्राप्त की जो मैं जानता था वास्तविक थी। इसने मेरा जीवन बदल दिया। जब एक व्यक्ति को वह सब मिल जाता है जिसके लिए उसका प्राण लालसा रख रहा हो, तब आंतरिक परिवर्तन होते हैं। वह पाता है कि उसके पुराने जीवन की चीजें कोई ताकत नहीं रखती। संसार के बारे में सच्चाई, अपनी पहचान, और जीवन में अपने उद्देश्य की खोज करने के वर्षों के बाद मेरी आत्मा में आंतरिक आनंद का एक ज्वार आया था।

 

जब इस व्यक्ति को यह बहुमूल्य मोती मिला, तो उसने अपने दिल में यह ठान लिया कि वो उसे लेकर रहेगा। कोई भी चीज़ उसे उससे दूर नहीं कर सकेगी। यह एक ऐसे व्यक्ति का हृदय है जो परमेश्वर को प्रसन्न करता है, एक ऐसा जन जिसके पास यह आंतरिक दृढ़निश्चय है कि मसीह के साथ संबंध रखने से उसे कुछ भी नहीं रोक सकता। आलौकिक लेन-देन अपने पापों को उसे देना है, कि वह आपको अपनी धार्मिकता से ढांपेगा। “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएं।” (2 कुरिन्थियों 5:21)

 

व्यापारी ने अपना सब कुछ बेच डाला

 

जब व्यापारी ने जो उसके सामने था उसके मूल्य को देखा, उसने तय किया कि मोती हासिल करने का एकमात्र तरीका यह था कि जो कुछ उसके पास है वह सब कुछ बेच देना। चलिए सोचते हैं कि यह प्रक्रिया व्यापारी के लिए कैसा रही होगी। इसमें कोई संदेह नहीं है, कि वो घर चला गया और उसने एक नीलामी आयोजित की - सब कुछ बेच देना होगा! उसकी गाड़ी, उसकी नाव, और उसका घर। कुछ भी उसे उस कीमती मोती से दूर नहीं कर सकता। यदि यह उसका मूल्य है, तो वह ख़ुशी से उसे चुकाएगा! टेलीविजन, X-बॉक्स, उसका स्मार्ट फोन, सब दरवाज़े से बाहर चला गया। उसने अपने सभी बचत, पेंशन योजना आदि, सब कुछ बेच लिया! फिर, वह गया और पड़ोस में घर की जल्द बिक्री के लिए विज्ञापन लगा दिए। जल्द बिक्री क्यों? क्योंकि उसे भय था कि कोई और मोती बेचने वाले के साथ बेहतर सौदा कर देगा।

 

25और जब बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी, तो उसने पीछे फिरकर उनसे कहा। 26यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्नी और बच्चों और भाइयों और बहिनों वरन अपने प्राण को भी अप्रिय जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता। 27और जो कोई अपना क्रूस उठाए; और मेरे पीछे आए; वह भी मेरा चेला नहीं हो सकता। 28 तुममें से कौन है कि गढ़ बनाना चाहता हो, और पहले बैठकर खर्च जोड़े, कि पूरा करने की बिसात मेरे पास है कि नहीं? 29कहीं ऐसा हो, कि जब नेव डालकर तैयार कर सके, तो सब देखनेवाले यह कहकर उसे ठट्ठों में उड़ाने लगें। 30कि यह मनुष्य बनाने तो लगा, पर तैयार कर सका? 31या कौन ऐसा राजा है, कि दूसरे राजा से युद्ध करने जाता हो, और पहिले बैठकर विचार कर ले कि अपने बीस हजार लेकर क्या उसका सामना कर सकता हूँ, कि नहीं? 32नहीं तो उसके दूर रहते ही, वह दूतों को भेजकर मिलाप करना चाहेगा। 33सी रीति से तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्याग दे, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता (लूका 14:25-33)

 

क्या यीशु यह कह रहा है कि हमें अपना सामान बेचना चाहिए? सब कुछ छोड़ देने से उसका क्या अभिप्राय है?

 

जब हम सम्पूर्ण जगत के परमेश्वर के साथ एक वाचा के संबंध में प्रवेश करते हैं, तो हम अपना सब कुछ त्याग देते हैं। तुम अपने नहीं हो? 20क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो (1 कुरिन्थियों 6:19-20) हम अब स्वामी नहीं हैं, लेकिन परमेश्वर के पास जो कुछ है उसके भंडारी हैं। मसीह को अपन जीवन देने के सन्दर्भ में, अब हम उन चीजों के प्रबंधक हैं जो पहले हमारे स्वामित्व में थीं। कुछ लोगों के लिए, जैसे मत्ती के सुसमाचार में जब धनी युवक ने जानना चाहा कि उसे किस किस बात की घटी है, यीशु ने उसे उत्तर दिया:

 

21यीशु ने उससे कहा, “यदि तू सिद्ध होना चाहता है; तो जा, अपना माल बेचकर कंगालों को दे; और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा; और आकर मेरे पीछे हो ले 22परन्तु वह जवान यह बात सुन उदास होकर चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था। (मत्ती 19:21-22)

 

प्रभु अपने सभी लोगों से यह आवश्यकता नहीं रखता, लेकिन इस व्यक्ति के मामले में ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि, उसका भरोसा उसकी संपत्ति में था, और जैसा कि हमने पहले कहा है, अलग किया हुआ या पूरी तरह से उसका होने के लिए, हमें अन्य चीजों से अपने हाथ खाली करने होंगे कि हम मसीह से उन्हें भर लें।

 

आप ऐसे किन सुख-विलासों के बारे में जानते हैं जो पाप के हैं और परमेश्वर के साथ आपके सम्बन्ध के रास्ते में खड़े हैं? वे इसके योग्य नहीं हैं। इन सभी को जाना होगा! पुरानी आदतों को चेतावनी देने की आवश्यकता है! जीभ की आदतें क्रूस पर लाने में और विजय प्राप्त करने में समय ले सकती हैं। मैं जानता हूँ कि निश्चित रूप से मेरे साथ तो ऐसा ही हुआ था। मछुआरों को उनकी अभद्र भाषा के लिए जाना जाता है, और मैं कोई अलग नहीं था। क्या आप अपने धर्म के कार्य और अच्छे कार्यों पर भरोसा रखते आए हैं? इसे भुला देने की ज़रूरत है। बाइबिल बताती है कि वैसे भी यह मैले चीथड़ों के समान है (यशायाह 64: 6)। अपनी प्रतिष्ठा भी ले आइये, क्योंकि जब यीशु क्रूस पर चढ़ा तो उसने अपनी प्रतिष्ठा का भी बलिदान कर दिया।

 

वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। (फिलिपियों 2:7)

यह वो स्थान है जहाँ बहुत लोग संकोच करते हैं। वे अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करना चाहते हैं। कुछ लोग इस बारे में चिंता करते हैं कि और लोग क्या सोचेंगे, काम पर लोग उनके बारे में क्या कहेंगे, या फिर यह कि इससे उनके पारिवारिक रिश्ते कैसे बदल सकते हैं। यीशु ने कहा, जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटे या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं।(मत्ती 10:37)

 

व्यापारी अनमोल मोती को मोल ले लेता है

 

हम उस चौथी चीज़ पर आते हैं जो व्यापारी करता है। वो उस पैसे को लेता है जो उसने अपनी संपत्ति बेचने से कमाए हैं, और वह मोती खरीद लेता है। ऐसा करने में उसे महान आनंद मिलता है! वह जो कीमत उसे चुकानी पड़ी उस सब के बारे में कत्तई नहीं सोच रहा। वो उस मोती को हासिल करने के आनंद से विस्मित है।

 

1976 में, मैंने एक अनूठी खरीदारी की। यह मेरे मसीही बनने से एक वर्ष पहले की बात है। मैं दिल्ली, भारत में था, और मैंने एक स्मारिका खरीदी। मैं एशिया की अपनी यात्रा से एक स्मारिका लेना चाहता था। यह एक चांदी का हाथी था जो कीमती पत्थरों से जड़ा हुआ था, और लगभग 10 इंच ऊँचा था, और इसके उपर सारथि बैठा था। उस हाथी ने अगले वर्ष मेरे साथ अमरीका की यात्रा की। यात्रियों के लिए विशेष चेक ले जाना आसान होता, लेकिन मेरी सोच यह थी कि यदि मुझे कोई परेशानी हुई, तो मैं हाथी को बेच डॉलर या आवश्यकता अनुसार किसी और मुद्रा में पैसा प्राप्त कर सकता था।

 

मसीही बनने के कुछ ही समय बाद, मैं वर्जीनिया में एक कलीसिया की सभा में था। सभा के बाद, मैंने एक जवान महिला को कहते सुना कि कैसे उसने अपने इज़रायल जाने के टिकट के लिए पहला डॉलर प्राप्त किया था! वह बहुत आनंदित थी। इसने मेरे दिल को छुआ, और मुझे एहसास हुआ कि उसके टिकट की कीमत के लिए वह हाथी मुझे उसे देना चाहिए। वह महिला अपने टिकट के लिए आवश्यक पैसों के लिए हाथी को बेच पाई। वह इतनी आभारी थी कि उसने मुझे इज़राइल आकर वहाँ के विश्वासियों के साथ रहने के लिए आमंत्रित किया। मुझे नहीं पता था कि यह किस प्रकार मेरे जीवन को बदलने वाला था। उस हाथी को खरीदने और देने के कारण मेरे जीवन में कई आशीषें आई हैं। परमेश्वर ने मुझे इज़राइल ले जाने में उसका इस्तेमाल किया जहाँ मैं बहुत से अद्भुत लोगों से मिला और मूल्यवान सबक सीखे। उन दोस्तों के माध्यम से जो मुझे वहाँ मिले थे, मैं अपनी पत्नी सैंडी से भी मिला।

 

हाथी के मामले में, मुझे लगता है कि आप कह सकते हैं कि मैंने अनायास खज़ाना पा लिया था। मुझे नहीं पता था कि वह खरीदारी मुझे आखिरकार कहाँ ले जाएगी।

 

जैसा कि मैंने इस अध्ययन की शुरुआत में उल्लेख किया है, इस दृष्टान्त को देखने के दो तरीके हैं। मैं लेखक और बाइबल शिक्षक आर.टी. केंडल का उद्धरण दूँगा। "एक व्यक्ति को यह जानना है कि हमारे लिए यह परमेश्वर की खोज के बारे में है। दूसरी बात यह है कि हम यह भी जानें कि यह परमेश्वर द्वारा हमें खोजने बारे में है। क्या आपको पता है कि जिसे अनमोल मोती मिलता है उसके बारे में सत्य क्या है? आप यह पाते हैं कि आपकी पूरी तलाश के पीछे परमेश्वर था, और आप उसे धन्यवाद देते हैं कि वह आपके साथ रहा, आपका ध्यान खींचा और सभी महत्वपूर्ण चीज़ों के ऊपर आपमें इसकी चाहत उत्पन्न की। तो अंतत: यह परमेश्वर ही था जो हमें खोज रहा था।"

 

प्रार्थना: पिता, प्रभु यीशु मसीह और क्रूस पर उसके संपन्न कार्य के लिए धन्यवाद, जहाँ वो मेरे पाप के दाम को चुकाने के लिए मेरे स्थान पर मरे। इस दुनिया की चीजों द्वारा अब मुझसे इस खजाने को और छिपाए रखने न दें। मसीह के साथ संबंध के मूल्य को देखने के लिए मेरी आँखें खोलें। मुझे अपने हाथों को उन चीज़ों से खाली करने में सहायता करें जिन्हें मैं जकड़े हुए हूँ, ताकि मैं मसीह द्वारा भरा जाऊं। अमीन!

 

कीथ थॉमस

नि:शुल्क बाइबिल अध्यन के लिए वेबसाइट: www.groupbiblestudy.com

-मेल: keiththomas7@gmail.com