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5. The Parable of The Hidden Treasure 

5. छिपे हुए खज़ाने और मोती का दृश्टान्त

शुरुआती प्रश्न: अभी आप जो सब जानते हैं उसे ध्यान में रखते हुए, अगर आप को रोकने के लिए कोई बाधा नहीं हो, और आप के लिए असीमित संसाधन उपलब्ध हों, तो आप किस व्यवसाय में प्रवेश करना चुनेंगे और क्यों?

 

44स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाकर छिपा दिया, और मारे आनन्द के जाकर और अपना सब कुछ बेचकर उस खेत को मोल लिया। 45फिर स्वर्ग का राज्य एक व्यापारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में था। 46जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला तो उसने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया। (मत्ती 13:44-46)

 

इन दोनों दृष्टान्तों में जिन्हें हम आज देख रहे हैं, हम उन दो लोगों के बारे में पढ़ते हैं जो महान मूल्य की वस्तु पाते हैं और यह कि वो खजाने और मोती के अपने स्वामित्व को सुरक्षित करने के लिए क्या करते हैं। पहला व्यक्ति अप्रत्याशित रूप से खज़ाने तक पहुँच जाता है; जबकि दूसरा व्यक्ति मोती की इच्छा रखता था और उसे खोज रहा था। दोनों दृष्टान्तों में, स्वर्ग के राज्य के साथ तुलना की गई है। इस अध्ययन का इरादा सिर्फ इसपर केन्द्रित होना नहीं है कि स्वर्ग का राज्य क्या है, क्योंकि यह तो अपने आप में ही एक विशाल विषय है; यह कहना पर्याप्त है कि परमेश्वर या स्वर्ग का राज्य (वचन में यह नाम एक दूसरे के समानार्थक शब्द हैं) परमेश्वर का शासन और हुकूमत है। जब एक व्यक्ति को स्वर्ग के राज्य में लाया जाता है, तो उसे क्रूस पर मसीह के सम्पूर्ण किये गए कार्य के द्वारा परमेश्वर के साथ सही संबंध में लाया जाता है। आइये, पहले एक खेत में छिपे खज़ाने के बारे में देखें।

 

खेत में छिपा हुआ खजाना

 

सबसे पहले, मैं चाहता हूँ कि आप कल्पना करें कि दबे हुए खजाने को अनायास पा लेना कैसा होगा। यह एक ऐसी बात है जो हम साहसिक अभियान पर जाने वाले लोगों या खोजकर्ताओं के साथ होने की कल्पना करते हैं, लेकिन यह सामान्य लोगों के साथ हुआ है जो बिना इसकी उम्मीद करे अपने रोज़मर्रा के कार्य कर रहे थे। वे खज़ाने की तलाश में नहीं थे।

 

27 सितंबर 2013 को, एक फ्रांसीसी पर्वतारोही को जो माउंट ब्लैंक से ग्लेशियर पर चढ़ाई कर रहा था, पन्ने, माणिक और नीलमणि का खज़ाना मिला जो दशकों से दफ़न था। ऐसा माना जाता है कि इस गहने के बक्से की कुल कीमत 356,435 अमेरिकी डॉलर होगी और यह एक भारतीय विमान में था जो 1966 में इस क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस पर्वतारोही ने स्थानीय पुलिस को इसे सौंप दिया। "यह एक ईमानदार नौजवान था जिसे बहुत जल्द यह एहसास हो गया था कि वे ग्लेशियर में मृत हुए किसी व्यक्ति के थे," स्थानीय पुलिस प्रमुख सिल्वेन मर्ली ने कहा। "वह उन्हें रख सकता था, लेकिन उसने उन्हें पुलिस को देना पसंद किया," मर्ली ने कहा, यह जोड़ते हुए कि पर्वतारोही ने अनायास बक्सा पाया और कि कुछ अनमोल पत्थरों की पन्नियों परभारत में निर्मितकी छाप थी। फ्रांसीसी अधिकारी उन जवाहरात के मालिकों या वारिसों का पता लगाने के लिए अपने भारतीय समकक्षों से संपर्क कर रहे हैं। फ्रांसीसी कानून के तहत, अगर इनकी पहचान नहीं हो पाती है, तो गहने पर्वतारोही को सौंप दिया जा सकते हैं, मर्ली ने कहा।

 

कभी-कभी, हम लोगों के अनायास दफन खज़ाने को पाने के बारे में सुनते हैं, जैसे हम इस खंड में पढ़ रहे हैं। इंग्लैंड के पूर्वी तट के समुद्रतल की गहराई तक मछली पकड़ने वाला मछुवारा होते हुए यह हमेशा से मेरा सपना रहा था कि एक दिन मेरा सामना विषम रेतीले टीले पर डूबे किसे ऐसे जहाज़ से होगा जिसमें सोना रखा हो। मैंने स्पैनिश अरमाडा जहाज़ो के बारे में खोज-बीन की थी, सोने से लदा वो जहाज़ जो हमारे तट के आस-पास कहीं डूब गया था, और एचएमएस विक्ट्री (नेल्सन के ध्वज-पोत से पहले), जो हमारे तट के किनारे कहीं वहाँ जहाँ मैं मछली पकड़ता था, 100,000 पुर्तगाली स्वर्ण के सिक्कों के साथ डूबा था। यदि मुझे खज़ाने के साथ इनमें से कोई भी जहाज़ मिल जाता, तो यह उस आत्मिक खज़ाने की तुलना में कुछ भी नहीं होगा जो मुझे मसीह में मिला है। खज़ाने से भरे पूरे संसार की तुलना में मसीह का धन बहुत अधिक मूल्यवान है।

 

उन दिनों में जब नया नियम लिखा गया था, उस समय कोई बैंक नहीं होते थे, जहाँ एक व्यक्ति अपने खज़ाने को यहूदिया और सामरिया से आने वाली कई लुटेरी सेनाओं से सुरक्षित रख सकता था। क्योंकि यह उन्हें रखने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान था, लोग जमीन में अपना कीमती सामान छिपाते थे। फिलिस्तीन में कई युद्ध हुए थे, और लोगों को कभी-कभी युद्ध के समय में अपने खजाने को इस आशा के साथ छोड़ना पड़ता था, कि लड़ाई समाप्त होने के बाद, वे इसे लेने वापस सकते हैं। कभी-कभी, लोग मारे जाते थे, और अन्य समयों पर उन्हें दूर के देश में भेज दिया जाता था, उदहारण के लिए जैसे कि अश्शूर और बाबुल में उनका भेजा जाना और तितर-बितर होना, और वे अपने क़ीमती सामान पुन: प्राप्त नहीं कर सकते थे। छिपे हुए खज़ाने के दृष्टान्त में ऐसा प्रतीत होता है कि वह व्यक्ति अमीर नहीं था, क्योंकि वह अपनी खोज पर बहुत उत्साह और आनन्द से भर गया था (मत्ती 13:44)

 

यहाँ तस्वीर संभवतः ज़मीन के एक टुकड़े पर मालिक के लिए हल चलाने के लिए लाए गए एक मजदूर की है। जब वह जुताई कर रहा था, तब खजाने का पता चला। जब उसने खज़ाने पर गौर किया, तो उसने अपनी खोज के मूल्य का एहसास किया और फैसला लिया कि वह इसे फिर से भूमि में छिपाएगा। प्राचीन रब्बिनी कानून में कहा गया था कि अगर किसी कर्मचारी को इस तरह की परिस्थिति में खज़ाना मिलता है, तो कानूनी उस खेत का स्वामित्व रखने वाला उस खज़ाने का स्वामी होगा। वह इसे चोरी कर पड़ोसी देश में बेच सकता था। खेत के स्वामी को तो पता भी नहीं चलता, लेकिन उसने अपनी सारी चीजों को बेचने का निर्णय लिया, और जब उसे पर्याप्त पैसा मिला, तब उसने खेत के स्वामी से उसे खरीद लिया।

 

क्या उस व्यक्ति ने अनैतिक कार्य किया क्यों या क्यों नहीं? दृष्टान्त का मुख्य मुद्दा क्या है?

 

इस दृष्टांत की दो व्याख्याएं हैं। पहली व्याख्या, कुछ लोग कहेंगे कि मसीह परमेश्वर का मज़दूर है जो खेतों में श्रम करने के लिए आया है और उसने अपना खजाना, कलीसिया, पा लिया है और उसने अपना सभी कुछ को दे दिया है ताकि वह खेत खरीदे अपने स्वयं के लहू से कलीसिया को अपने लिए मोल ले सके। कुछ बाइबल विद्वानों ने इस दृष्टिकोण को रखा है, और यह व्याख्या संभवत: पृथक है।

 

हालांकि, एक और तरीका है जिससे इस दृष्टान्त के अर्थ की व्याख्या की जा सकता है। दोनों दृष्टान्तों में मैं इस व्याख्या का समर्थन करता हूँ। दूसरी व्याख्या में, स्वयं मसीह खजाना है। कुछ ऐसे लोग जो उसे खोज नहीं रहे थे, लेकिन किसी तरह से, उन्होंने उस विश्व रुपी खेत में जहाँ यह नज़रों से छिपा हुआ था, मसीह की सच्चाई पाई। कुछ लोग इसमें कोई मूल्य नहीं देखते। वे केवल खेत देखते हैं, लेकिन वे सतह की चीज़ों से नीचे, छिपे हुए खजाने को नहीं देखते। वह लोग जो इसमें थोड़ा मूल्य देखते हैं, वे केवल इस संसार के परिदृश्य से चीजों को देखते हैं। उनके लिए परमेश्वर की चीज़ें मूर्खता हैं (1 कुरिन्थियों 2:14) दूसरों को अनन्तकाल की बातों में महान मूल्य दिखता है, और वे अनदेखे संसार की चीजें थामे रहने के लिए इस अस्थायी दुनिया की चीजों के साथ उसे अदल-बदल कर लेते हैं। प्रेरित पौलुस की गवाही ऐसी ही थी:

 

वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूँ: जिसके कारण मैंने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूँ, जिससे मैं मसीह को प्राप्त करूँ। (फिलिपियों 3:8)

 

मुझे यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि परमेश्वर के साथ एक सम्बन्ध "खरीदा” नहीं जा सकता। ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे हम अपने प्रयासों और संसाधनों से धार्मिकता को खरीद सकते हैं। मेरा मानना ​​है कि इस खंड में ज़ोर उस मूल्य के बारे में है जो वो व्यक्ति इस खज़ाने को देता है और यह निर्णय है कि वह इसे हर कीमत पर हासिल करे। इस दृष्टान्त में, सभी दृष्टान्तों की तरह ही, विवरणों पर बल नहीं दिया जाना चाहिए। हमें कहानी की मुख्य बिंदु को थामना है। बाकी सब कुछ उस बिंदु के अधीन है। जब हम कोई खरीदारी करते हैं तो क्या होता है? एक चीज को दूसरे के लिए बदल लिया जाता है। इस मामले में, हमारे टूटे जीवन उसके अनन्त जीवन के लिए। “आओ सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।” (यशायाह 55:1) जब हम कुछ खरीदते हैं, तब हम किसी ऐसी चीज़ को पाने के लिए जिसे हम अधिक मूल्यवान मानते हैं, किसी वस्तु या कीमती चीज़ को बदले में दे देते हैं। हमें सब कुछ बेचने और अपने प्राणों को प्रभु यीशु पर केंद्रित करने में उस महान बहुमूल्यता को देखना होगा कि हम प्राप्त कर सकें “पूरी समझ का सारा धन प्राप्त करें, और परमेश्वर पिता के भेद को अर्थात् मसीह को पहचान लें। जिसमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्डार छिपे हुए हैं।” (कुलुस्सियों 2:2-3) प्रेरित पौलुस की तरह ही, परमेश्वर हमारे साथ भी इस संसार की बातों पर हमारी पकड़ को ढीला करना चाहेगा ताकि हम मसीह को प्राप्त कर सकें। इस दृष्टान्त में आदमी ने सब कुछ बेच दिया था ताकि वह इस खेत को खरीद सके।

 

 

एक दिन, आपको इस दुनिया को छोड़ना होगा, और यदि जीवन में आपका ध्यान छिपे खजाने के बजाय सिर्फ इस दुनिया के खेत पर ही है, तो आपके अंतिम शब्द क्या होंगे? प्रसिद्ध फ्रांसीसी आत्मज्ञानी दार्शनिक वोल्टेयर ने मरने से बिलकुल पहले कहा, “परमेश्वर के नाम पर, कृपया मुझे शांति से मरने दीजिए”। एलिज़ाबेथ 1, इंग्लैंड की रानी के आखिरी शब्दों पर भी विचार करें, जिन्होंने कहा था, "एक पल के लिए मेरी सारी संपत्ति।" हमें अपनी ज़िंदगी को आने वाले जीवन को ध्यान में रखते हुए जीना चाहिए। याद रखें, इस पृथ्वी पर हमारा जीवन इस स्तर पर हमारे अस्तित्व से परे आने वाले वास्तविक जीवन की मात्र छाया है। अगर हम मसीह के व्यक्ति को ग्रहण करें, तो परमेश्वर हमें अपने खज़ाने की पेशकश करता है। उसके साथ, हमें सब कुछ मिलता है। “जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा? (रोमियों 8:32) बहुत से लोग जो उद्धारकर्ता की बात करने वाले शब्दों से सामना करते हैं, बाद में पछतावा करेंगे कि उन्होंने इस वचन की सच्चाई को पकड़ क्यों नहीं लिया। मसीह का यह सुसमाचार संसार के खेत में छिपा हुआ है, लेकिन लोग दिन प्रतिदिन, बिना इस बात पर ध्यान कर कि वे इस संसार से होते हुए कहाँ जा रहे हैं, अपने खेतों में हल चलाते रहते हैं।

इस दृष्टान्त में यह आदमी बाहर निकला और उसने दूसरी चीजों पर अपनी पकड़ जाने दी ताकि वह खज़ाने को पूरी तरह से समेट सके। इस संसार की बातों पर हमारी पकड़ को छोड़ने के लिए, हमें अपने आप को प्रभु के लिए पवित्र या अलग करना है “शान्ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे(1 थिस्सलुनीकियों 5:23)अंग्रेजी शब्द अलग किया जाना का इब्रानी शब्द, मैले' (מלא - स्ट्रॉन्ग कॉनकॉर्डन्स का 04390) और याद (יד- स्ट्रॉन्ग के 03027) से अनुवाद किया गया है। इसका शाब्दिक अर्थ है भरे हाथ होना। सोच यह है कि हम स्वयं को सृष्टिकर्ता परमेश्वर को इस रीती से सौंप दें कि हमारे हाथ अन्य चीज़ों से खाली हैं ताकि हम परमेश्वर से परिपूर्ण हो सकें। यह संभव है कि हम कुछ चीज़ों को इतनी मज़बूत पकड़ से थामे रहें कि हम उन चीज़ों को प्राप्त नहीं सकते जो परमेश्वर हमें देगा। हमारे हाथ सभी प्रकार की चीज़ों से भरे हो सकते हैं। हम सोच सकते हैं कि वे चीज़ें हमारे स्वामित्व में हैं; हालांकि, कभी-कभी वे हमारा स्वामित्व करती हैं! यहाँ तक ​​कि करने और नहीं करने की सतर्क प्रणाली के साथ मनुष्य द्वारा बनाए धर्म भी एक व्यक्ति को मसीह में सच्चाई को पकड़ने से अलग कर सकते हैं। किसी भी ऐसी चीज़ से छुटकारा पाएं जो आपको अनन्त खज़ाने को पकड़ने से रोकती हैं। अपना हाथ खोलें ताकि वह उन्हें भर सके। आइये अब दूसरे दृष्टान्त पर एक नज़र डालें।

 

अनमोल मोती का दृष्टान्त

 

45फिर स्वर्ग का राज्य एक व्यापारी के समान है जो अच्छे मोतियों की खोज में था। 46जब उसे एक बहुमूल्य मोती मिला तो उसने जाकर अपना सब कुछ बेच डाला और उसे मोल ले लिया। (मत्ती 13:45-46)

 

यीशु एक व्यापारी की उपमा को क्यों चुनता है