42. Jesus Reinstates Peter

42. यीशु पतरस को पुन: स्थापित करता है

हम प्रेरित यहुन्ना द्वारा यीशु के जीवन के बारे में बताए इन पिछले बयालीस अध्ययनों का एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। यहुन्ना अब अपने सुसमाचार के अंतिम अध्याय, एक उपसंहार, और पतरस की विफलता से संबंधित एक निष्कर्ष पर आता है। यहुन्ना हमें इस सोच में नहीं छोड़ना चाहता कि पतरस के तीन-बार इनकार के बाद उसके साथ क्या हुआ, और वह हमारे साथ उसके सम्पूर्ण मेल-मिलाप और पुन: स्थापना की कहानी साझा करता है। इस अध्ययन में, हम प्रभु की कृपा को देखेंगे, क्योंकि जब उसने पतरस को प्रेरित के रूप में पुन: स्थापित किया, तो यह उसके प्रेरित होने की संपूर्णता में थाइन शब्दों से उन सभी को आशा और प्रोत्साहन मिलना चाहिए जो जानते हैं कि विफलता का अनुभव करना कैसा होता है। मुझे लगता है कि इसमें हम सभी शामिल हैं!

 

पूरे अध्याय बीस के दौरान, प्रेरित यूहन्ना उन व्यक्तियों की विभिन्न गवाहियों की ओर केन्द्रित होता है जिन्होंने जी उठने के बाद प्रभु को देखा और उसे बात की थी। हम जानते हैं कि पहली बार यह पुनरुत्थान की रात बंद कमरे में हुआ था, जिस रात थोमा वहाँ नहीं था। दूसरी बार, यह एक सप्ताह बाद था जब मसीह फिर से शिष्यों के सामने प्रकट हुआ, लेकिन इस बार थोमा भी वहाँ था (यहुन्ना 20:26)। गलील के समुद्र में प्रकट होना तीसरी बार था जब यीशु अपने शिष्यों के सम्मुख सामूहिक रूप से प्रकट हुआ थामत्ती दर्ज करता है कि यीशु ने उन्हें बताया था कि वह उन्हें गलील के समुद्र पर मिलेगा (मत्ती 28:10)

 

चेले मछली पकड़ने निकलते हैं

 

1इन बातों के बाद यीशु ने अपने आप को तिबिरियास झील के किनारे चेलों पर प्रगट किया और इस रीति से प्रगट किया। 2शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, और गलील के काना नगर का नतनएल और जब्दी के पुत्र, और उसके चेलों में से दो और जन इकट्ठे थे। 3शमौन पतरस ने उनसे कहा, “मैं मछली पकड़ने को जाता हूँ”; उन्होंने उससे कहा, हम भी तेरे साथ चलते हैं” सो वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात कुछ न पकड़ा। (यहुन्ना 21:1-3)

 

मैंने कई बार इज़राइल के गलील क्षेत्र का दौरा किया है, और यह एक बहुत ही शांतिपूर्ण जगह है। गलील का समुद्र कोई महत्वपूर्ण जल स्रोत नहीं है, बल्कि उत्तर से दक्षिण तक लगभग बारह मील और लगभग छह मील चौड़ा, एक झील के आकार से अधिक नहीं है। वचन इसे गन्नेसरत की झील के रूप में भी संदर्भित करता है, जबकि रोमी लोग इसे तिबिरियास झील कहते थे। सात दिनों के अखमीरी रोटी के पर्व के समापन के साथ, अब उन्होंने उत्तर की ओर इज़राइल के गलील क्षेत्र में अस्सी मील की पैदल यात्रा शुरू की।

 

पुनरुत्थान के बाद, जब चेले उत्तर की तरफ गलील की ओर आगे बढ़ रहे होंगे, तो आपको क्या लगता है कि उनके मनों में यीशु से पूछने के लिए किस तरह के सवाल थे? आपको क्या लगता है कि जब वह यीशु से मिलने के लिए तैयार हो रहा होगा, तो पतरस के मन में क्या चल रहा होगा?

 

उस तीन से चार-दिवसीय यात्रा के दौरान, जब वो यीशु से मिलने की अपेक्षा कर रहा था, तब पतरस की भावनाओं की कल्पना करें। इसकी बहुत संभावना है, कि वो अपने द्वारा मसीह को नकारने और यीशु उसे क्या कहेगा, इसके साथ संघर्ष कर रहा होगा। क्योंकि वह इतनी बुरी तरह से विफल हुआ था, हो सकता है कि वह अन्य शिष्यों के संग रहने के अयोग्य महसूस कर रहा था, लेकिन जब सैनिक मसीह को गिरफ्तार करने आए थे तो अधिकांश शिष्य भाग गए थे। प्रभु पतरस का हृदय जानता था। उसने सुनिश्चित किया कि पतरस को निमंत्रण मिला है! जब स्वर्ग-दूत खाली कब्र पर महिलाओं को प्रकट हुए थे, तो उन्होंने सुनिश्चित किया कि पतरस को स्पष्ट रूप से गलील में पुनर्मिलन के लिए आमंत्रित किया गया हो;

 

परन्तु तुम जाओ, और उसके चेलों और पतरस से कहो, कि “वह तुम से पहले गलील को जाएगा; जैसा उस ने तुम से कहा था, तुम वहीं उसे देखोगे” (मारकुस 16:7; बल मेरी ओर से जोड़ा गया है)

 

हम सभी को आमना-सामना होने से डर रहता है। हालांकि इस बात पर निर्भर कि उनसे कैसे बात और संपर्क किया जाता है, आमना-सामना होना या करना किसी व्यक्ति द्वारा किया या उसके साथ किया गया सबसे प्रेम भरा कार्य हो सकता है। प्रभु ने पतरस से कहा कि वह उसे गलील में मिलेगा, जिसका मुझे यकीन है कि शत्रु, शैतान ने उसके कान में फुसफुसाते हुए दोष लगाने के लिए उसका फायदा उठाया होगा। हम सभी के पास ऐसे समय रहे हैं जब शत्रु ने हमें अपनी विफलताओं के साथ आमना-सामना कराया होगा। जब हम असफल होते हैं तो शैतान का हमें कुचलने का एक तरीका है। उसे ऐसे ही "भाइयों पर दोष लगाने वाला" नहीं कहा जाता (प्रकाशितवाक्य 12:10)। हमारे प्राणों का शत्रु प्रभु में हमारे विकास और प्रभाव को रोकने के लिए हमें विश्वास दिलाना चाहता है कि हम योग्य नहीं हैं।

 

विफलता; रचनात्मकता का द्वार

 

कोई भी पूर्णकालिक पासबान लंबे समय तक ऐसे व्यक्तियों से सामना किए बिना नहीं रह सकता जिसे हमारे प्राणों के शत्रु ने यह भरोसा न दिला दिया हो कि उनके लिए आगे बढ्ने का कोई मार्ग नहीं, क्योंकि परमेश्वर के सम्मुख उनका पाप क्षमा योग्य नहीं है। वह झूठा है और झूठ का पिता है। जब भी हम उस दोष लगाने वाली आवाज को सुनें, तो हमें उसके विपरीत कार्य करना चाहिए। जब शैतान हम पर दोष लगाता है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि हम जो कर रहे हैं वह उसके राज्य को धमकाने वाला है। वह उन लोगों को परेशान नहीं करता है जो आत्मिक रूप से सोए हुए हैं। यदि वह आपको कठिन समय दे रहा है और आप पर विफलता का आरोप लगा रहा है, तो इसका कारण यह है कि वह जानता है कि यदि आप कभी भी आगे की ओर गिरते हैं, तो आप और मजबूत हो जाएंगे। शैतान चाहता है कि हम उसकी निंदा और दोषारोपण के द्वारा पीछे गिरें और पीछे हटें।

 

जब हम अपने पाप को प्रभु के सामने स्वीकार करते हैं, तो हम अनुग्रह और क्षमा प्राप्त करते हैं। कृतज्ञता और अनुग्रह की सराहना हमें मजबूत बनाती है और परमेश्वर पर हमारी निर्भरता को गहरा करती है। विफलता पर हमारा प्रति-उत्तर ही इस बात में निर्णायक होता है कि हम उस बिन्दु से कहाँ जाएंगे। जब हम विफल होते हैं, तो शत्रु हमें लूत की पत्नी की तरह ही पीछे मुड़ कर देखने के लिए प्रेरित करता है, जिसने गहरी लालसा से पीछे मुड़ कर सदोम की ओर देखा था और नमक के स्तंभ में बदल गई थी (उत्पत्ति 19:26)। जब जीवन कठिन हो जाता है, तो हम याद करते हैं कि बीता समय कैसा था, लेकिन अगर हमें कभी वापस जाने की लालसा होती है, तो चीजें कभी भी वैसी नहीं होती जैसी वे हुआ करती थीं, क्योंकि हम पाते हैं कि हम बदल गए हैं।

 

पीछे मुड़ने से, हम कभी आत्मिक रूप से परिपूर्ण नहीं होते। जब इज़रायल की संतानों ने प्रतिज्ञा के देश तक पहुँचने के मार्ग को कठिन पाया, तो वह वापस मिस्र लौटना चाहते थे, लेकिन यह कोई विकल्प नहीं था (गिनती 14:1-4)। जब मुझे लगा था कि प्रभु मुझे वाणिज्यिक मछली पकड़ने की अपनी बहुत ही आकर्षक नौकरी छोड़ उसके पीछे चलने को कह रहा है, तो मैंने अपना जाल छोड़ दिया और विषम जीवन जीते हुए खिड़कियाँ साफ करनी शुरू कर दीं। पूर्णकालिक सेवकाई में आने से पहले, प्रभु ने मुझे कई वर्षों तक प्रशिक्षित किया। यह कल्पना करते हुए कि क्या मैंने सही चुनाव किया था, ऐसा समय कई बार आया जब मैंने एक मछुआरे के रूप में अपने काम पर वापस लौटने के बारे में सोचा। अगर मैं वापस चला गया होता, तो मुझे विश्वास है कि मैं आज जो काम कर रहा हूँ, वह नहीं कर रहा होता। मेरे लिए अपने जाल को पीछे छोड़ने का समय आ गया था।

 

एक ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने समुद्र और उसके आसपास रहने का अनुभव किया है, यह एक विशेष आकर्षण है। यह समुद्र तट को धोने वाली लहरों की शांति, पानी की गंध, झील की सुंदरता और निश्चित रूप से, बंदरगाह पर मछली की गंध हो सकती है। यह सब पतरस के लिए बहुत लुभावना था, और अच्छे समय की सभी पुरानी यादें वापस लौट आईं। क्या यह दिलचस्प नहीं है कि जब हम वापस जाने के लिए लुभाए जाते हैं, तो हम कभी भी कठिन समय याद नहीं करते, केवल अच्छे समय को ही याद करते हैं?

 

मछली पकड़ने जाना

 

पतरस ने अन्य शिष्यों से कहा,

 

शमौन पतरस ने उनसे कहा, “मैं मछली पकड़ने को जाता हूँ; उन्होंने उससे कहा, हम भी तेरे साथ चलते हैं”; सो वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात कुछ न पकड़ा। (यहुन्ना 21:3)

 

किस तरह के विचारों ने पतरस में मछली पकड़ने जाने की इच्छा को प्रेरित किया? आपको क्या लगता है कि यदि वह मछुआरे के रूप में अपने पुराने जीवन में वापस चला गया होता, तो पतरस के साथ क्या होता? क्या आप कभी किसी ऐसी जगह या परिस्थिति पर वापस लौटे हैं जहाँ लौट कर आपको महसूस हुआ हो कि चीजें अब वैसी नहीं थीं?

 

वापस जाने में परेशानी यह है कि हम अक्सर दूसरों को भी अपने साथ खींचते हैं, और उस दिन पतरस के साथ भी ऐसा ही हुआ, क्योंकि उसके साथ छह अन्य चेले गए थे। हम सभी अपने जीवन से दूसरों को प्रभावित करते हैं, कुछ अधिक, कुछ कम, लेकिन जब हम दूसरों को पाप करने के लिए प्रभावित करते हैं, तो यह पूर्णत: अलग विषय है। मछली पकड़ने जाना पाप नहीं था। वे इससे परिचित थे और वह यीशु के लिए इंतजार करते समय इसे कर सकते थे, लेकिन जब कुछ चीज़ लोगों को उन्हें वो करने से दूर ले जाती हैं जिसे करने को परमेश्वर ने उन्हें बुलाया है, तो यह प्रभु के बजाय स्वयं की सेवा करने की एक फिसलन भरी ढलान है। जब हम परमेश्वर की चीज़ों को करने में बहुत व्यस्त हो जाते हैं तब हम जितना व्यस्त परमेश्वर हुमें देखना चाहता है, उससे ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं। इसके परिणाम स्वरूप हमारी आत्मा के भीतर तृप्ति की कमी हो जाती है। यीशु ने कहा, "जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं" (लूका 9:62)

 

यहाँ तस्वीर खेत की जुताई करने वाले व्यक्ति की है। यदि वह अपनी आंखों को अपने आगे एक खास बिंदु पर टिकाए रखता है तो वह हल एक सीधी रेखा में चला सकता है। लेकिन यदि वो अपने पीछे देखते हुए एक सीधी रेखा में हल चलाने की कोशिश करता है तो यह एक समस्या है, वह एक फलदार सेवक नहीं हो सकता। वर्ष 1519 में, कैप्टन हर्नान कोर्टेस मेक्सिको पर अपना विजय अभियान शुरू करने के लिए वेराक्रूज़ में उतरे। वहाँ पहुंचने पर, उसने अपने लोगों को जहाजों को जलाने का आदेश दिया, ताकि जीत हासिल करने से पहले उनके मन में वापस जाने का कोई विचार न हो। मसीह में विश्वासियों के रूप में, हमारे जीवन में कुछ ऐसी चीजें हैं जिसे हमें जलाना होगा ताकि हम कभी भी अपने पुराने जीवन में वापस जाने के बारे में न सोचें।

 

आपने अपने पुराने जीवन की किन चीजों को जलाया है ताकि आप वापस लौटने के बारे में न सोचें? या तो यह या फिर किन चीजों को जलाने की आवश्यकता है?

 

हमें यीशु, अपने विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले की ओर आँखें टिकाए रखनी हैं (इब्रानियों 12:2)। प्रभु जानता था कि पतरस अपने पुनः स्थापना और प्रभु की आज्ञा के बिना, अपने पुराने जीवन में वापस लौट जाएगा। मसीह ने उन्हें पिछली असफलताओं को थामे नहीं रहने दिया, लेकिन पतरस को परमेश्वर की भेड़ों को चलाने की उसकी बुलाहट के लिए पुनः स्थापित किया।

यहुन्ना लिखता है कि जब शिष्य रात भर मछली पकड़ चुके थे, सुबह-सुबह यीशु ने उन्हें मछ्ली के विषय में जानने के लिए किनारे से पुकारा, जैसे कि उसे पता था कि उनके पास कोई मछली नहीं है;

 

4भोर होते ही यीशु किनारे पर खड़ा हुआ; तौभी चेलों ने न पहचाना कि यह यीशु है। 5तब यीशु ने उन से कहा, हे बालकों, क्या तुम्हारे पास कोई मछली नहीं?” उन्होंने उत्तर दिया, “नहीं”। 6उसने उनसे कहा, नाव की दाहनी ओर जाल डालो, तो पाओगे”, तब उन्होंने जाल डाला, और अब मछिलयों की बहुतायत के कारण उसे खींच न सके। 7इसलिये उस चेले ने जिससे यीशु प्रेम रखता था पतरस से कहा, यह तो प्रभु है”; शमौन पतरस ने यह सुनकर कि प्रभु है, कमर में अंगरखा कस लिया, क्योंकि वह नंगा था, और झील में कूद पड़ा। 8परन्तु और चेले डोंगी पर मछिलयों से भरा हुआ जाल खींचते हुए आए, क्योंकि वे किनारे से अधिक दूर नहीं, कोई दो सौ हाथ पर थे। (यहुन्ना 21:4-8)

 

कुछ लोग कहते हैं कि मछुआरों पर कभी सच्चाई से यह बताने का भरोसा नहीं किया जा सकता कि उन्होंने क्या पकड़ा है। मुझे आशा है कि मैंने उस साँचे को तोड़ दिया है! अगर कोई मछुआरा मछली पकड़ रहा है, तो वह आपको यह कभी नहीं बताएगा क्योंकि वह नहीं चाहता है कि आप यह देखें कि वह कहाँ मछली पकड़ रहा है, उसे डर है कि आप अगले दिन उसी स्थान पर हो सकते हैं! यदि वह मछली नहीं पकड़ पा रहा है, तो भी वह आपको यह नहीं बताएगा, क्योंकि मछुआरे के लिए मछली न पकड़ पाना शर्म की बात है। उस सुबह यीशु के साथ शिष्य ईमानदार थे और उन्होंने कहा कि उनके पास मछली नहीं थी। जब तक प्रभु नाव में नहीं है, तब तक जीवन निष्फल हो सकता है।

 

हालाँकि वे अभी तक यह नहीं पहचान पाए थे कि वह प्रभु था जो उनसे बात कर रहा था, जब यीशु ने नाव के दाईं ओर कोशिश करने के लिए कहा, तो उन्होंने ऐसा किया। तुरंत, उन्होंने बहुत अधिक संख्या में मछलियाँ पकड़ीं, इतनी कि उन्हें जाल वापस नाँव में खींचने में कठिनाई हुई। उनका मन तुरंत तीन वर्ष पहले के समय में वापस चला गए जब यीशु ने उन्हें भले ही यह दिन का समय था, अपनी नाव को गहरे पानी में धकेलने और अपने जाल को फिर से डालने का निर्देश दिया। वह किस्सा तब घटा था जब उन्होंने मछली पकड़ने के सबसे उपयुक्त समय, पूरी रात कोशिश की थी लेकिन कुछ भी पकड़ नहीं पाए थे। जब उन्होंने प्रभु की बात मानी, तो उन्होंने इतनी मछलियाँ पकड़ीं कि उनकी दोनों नाँव डूबने तक पहुँच गईं! (लूका 5: 4-11)। प्रभु ने उस चमत्कार का उपयोग उन्हें अपने पीछे आने के लिए आमंत्रित करने के लिए किया, अर्थात, उस दिन से आगे वे मनुष्यों को पकड़ेंगे। इस कथन पर, चारों मछुआरे (पतरस, अंद्रियास, याक़ूब और यहुन्ना) सभी कुछ छोड़कर उसके पीछे चल दिए।

 

अब, एक बार फिर, यीशु ने उन्हें अलौकिक शिकार देकर प्रकृति पर अपना अधिकार प्रदर्शित किया। जब उन्होंने एक असामान्य समय में पकड़ी गई मछलियों की संख्या को देखा, तो इसने पुष्टि की कि किनारे पर कौन था क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने इस अतिश्योक्तिपूर्ण शिकार को पहले भी होते देखा है (लूका 5:4-7)। स्वयं को उस शिष्य के रूप में संदर्भित करते हुए जिससे यीशु प्रेम करता था, यहुन्ना ने उत्साह-पूर्वक पतरस से कहा, यह तो प्रभु है” (पद 7)। यीशु का दर्शन कितना मनभावन दृश्य था, और यह कितना अद्भुत था कि वह उसके साथ उनकी पहली मुलाकात की जगह फिर से उपस्थित होगा और उन्हें उसकी याद दिलाएगा।

 

यहुन्ना के शब्दों के बाद, पतरस ने जल्दी से अपने बाहरी परिधान से खुद को लपेट लिया, ठीक वैसे जैसे हम अपनी शर्ट डालते हैं। अनगिनत बार समुद्र में जाल डालने और फिर उसे वापस खींचने के कारण वह संभवतः कमर तक नग्न था। आवेगी आदमी होने के कारण, पतरस नाव के किनारे पर आने तक के लिए इंतजार नहीं कर सका; लेकिन, वह पानी में कूद गया और तैर कर यीशु तक पहुँचा। जब पतरस तैर कर प्रभु के पास पहुँचा और उसका अभिवादन किया, उसे औरों को मछली से भरे जाल को अंदर खींचने में मदद करने के लिए वापस नाव पर जाना पड़ा (यहुन्ना 21:11)। जाल को वापस खींचने के लिए सभी मज़दूरों की आवश्यकता है। आइये उस तालाब में कुछ समय बिताएँ;

 

यदि जाल को खींचने में सबके हाथ शामिल नहीं होंगे, तो कई मछलियाँ खो सकती हैं। यह आज भी वैसा ही है जब कई लाखों लोगों ने उद्धारकर्ता के बारे में कभी नहीं सुना है। अगर हम अपना हाथ जाल पर नहीं रखेंगे, तो दूर के देश कैसे सुनेंगे और बचाए जाएंगे?

 

एक साथ जाल खींचना

 

47फिर स्वर्ग का राज्य उस बड़े जाल के समान है, जो समुद्र में डाला गया, और हर प्रकार की मछिलयों को समेट लाया। 48और जब भर गया, तो उसको किनारे पर खींच लाए, और बैठकर अच्छी अच्छी तो बरतनों में इकट्ठा किया और निकम्मी, निकम्मीं फेंक दी। 49जगत के अन्त में ऐसा ही होगा; स्वर्गदूत आकर दुष्टों को धमिर्यों से अलग करेंगे, और उन्हें आग के कुंड में डालेंगे। 50हाँ रोना और दांत पीसना होगा। (मत्ती 13:47-50)

 

संसार अब एक ऐसे समय में है जहाँ हमें सुसमाचार के जाल को खींचने के लिए नाव पर मौजूद सभी हाथों की आवश्यकता है। कोई यह न सोचें कि उसके पास काम नहीं है। यदि आप मसीह के व्यक्ति को जानते हैं, तो आपके पास एक ऐसा संदेश है जिसकी आवश्यकता दूसरों को है।

 

चाहे बोने वाला बीज लेकर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियाँ लिए जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा (भजन 126:6)

 

मसीही के रूप में, यदि हम सुसमाचार को बाँटने के लिए संसार में नहीं जा सकते, तो हमें वह करना चाहिए जो हम अपने प्रभु के राज्य को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। जाल क्या है? एक जाल एक दूसरे से बंधे या गांठों के कई जोड़ों से बना और एक साथ गंठा होता है। सभी की आवश्यकता है। हमें सम्पूर्ण कलीसिया की सम्पूर्ण संसार को सम्पूर्ण सुसमाचार का प्रचार करने की आवश्यकता है। सुसमाचार स्वयं ही अन्यजातियों के गलील सागर पर फेंका गया जाल है। जल्द ही, एक समय आएगा जब प्रभु और उसके स्वर्गदूत आएंगे और अच्छे को निकम्मों से अलग करेंगे। अन्य स्थानों में, फसल का समय तब होगा, जब जिन्होंने अपने संसाधनों को टूटे और बिलखते हुए दिल से खोए हुए लोगों के लिए बोया है, वह एक ऐसा समय देखेंगे जब गेहूँ, परमेश्वर के लोगों का प्रतीक, एक साथ इकट्ठे किए जाएंगे।

 

यीशु संग नाश्ता

 

9जब किनारे पर उतरे, तो उन्होंने कोएले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी। 10यीशु ने उनसे कहा, जो मछिलयाँ तुमने अभी पकड़ी हैं, उनमें से कुछ लाओ।” 11शमौन पतरस ने डोंगी पर चढ़कर एक सौ तिर्पन बड़ी मछिलयों से भरा हुआ जाल किनारे पर खींचा, और इतनी मछिलयाँ होने से भी जाल न फटा। 12यीशु ने उनसे कहा, आओ, भोजन” करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उससे पूछे, कि तू कौन है? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही है। 13यीशु आया, और रोटी लेकर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी। 14यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए। (यहुन्ना 21:9-14)

 

यह ध्यान देने योग्य है कि, जब शिष्य किनारे पर पहुँच गए, तो यीशु ने पहले से ही एक कोयले की आग जला ली थी और वह मछली की प्रतीक्षा कर रहा था। फिर उसने सभी के लिए मछली के साथ खाने के लिए रोटी निकाली (युहन्ना 21:13)। उस संभावित स्थान के करीब ही वही जगह थी जहाँ प्रभु ने मछलियों और रोटी को पाँच हजार लोगों के लिए गुणा किया था। अब, वह यहाँ उन्हें फिर से खिला रहा था। ठीक उसी तरह जिस तरह ऊपरी कक्ष में जब उसने पैर धोए थे, उसने अब उनका नाश्ता तैयार किया। मैं कल्पना करता हूँ अगर पतरस ने गौर किया होगा कि यीशु लकड़ी की आग पर नहीं बल्कि कोयले की आग पर मछली पका रहा था। अगर उसने गौर किया होगा, तो मुझे आश्चर्य होता है कि क्या यह उसे लगभग दो सप्ताह पहले उस घटना की याद में ले गया होगा जब महायाजक के आंगन में उसने यीशु को न जानने की गुहार लगाई थी। अँग्रेजी न्यू इंटरनेशनल वर्जन इस तथ्य को सामने नहीं लाती है कि पतरस ने एक कोयले की आग के सामने यीशु का इनकार किया था, लेकिन अधिकांश अन्य अनुवाद ऐसा करते हैं (यहुन्ना 18:42)। पतरस कोयले की आग से एक टूटे हुए आदमी की तरह उठ चला जाता है, लेकिन आज के हमारे खंड में, उसे कोयले की आग के पास पुनः स्थापित किया जाता है।

 

पतरस को प्रभु से क्षमा की आवश्यकता थी, लेकिन उसे स्वयं को भी क्षमा करने की आवश्यकता थी। हम में से कई लोगों को भी, जो इन शब्दों को पढ़ रहे हैं, ऐसा ही करने की आवश्यकता है। यदि पतरस को परमेश्वर के झुंड को चराने की ज़िम्मेदारी दी गई थी, तो उसे दूसरों की उपस्थिति में क्षमा प्राप्त करने और पुनः स्थापित किए जाने की आवश्यकता थी। उसने सार्वजनिक रूप से यीशु का इंकार किया था, और अब उसे सार्वजनिक रूप से पुनः स्थापित किया गया था।

 

पतरस की पुन: स्थापना (यहुन्ना 21:15-17)

 

15भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इनसे बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है? उसने उससे कहा, हाँ प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझसे प्रीति रखता हूँ”; उसने उससे कहा, मेरे मेमनों को चरा।” 16उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है? उसने उससे कहा, हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ”; उसने उससे कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर”। 17उसने तीसरी बार उससे कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि “क्या तू मुझसे प्रीति रखता है”? और उससे कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है, तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ”; यीशु ने उससे कहा, मेरी भेड़ों को चरा”। (यहुन्ना 21:15-17)

 

 

अक्सर, जब किसी व्यक्ति को किसी मुद्दे पर दूसरे का सामना करना पड़ता है, तो कठिन हिस्सा जिस मुद्दे से निपटना है उसे उठाना है। यीशु इस मुद्दे को कैसे उठाता है? पहली चीज़ जो हम देखते हैं, वह यह है कि प्रभु ने उसे उस नाम से पुकारा जिसे सुनते हुए वह बड़ा हुआ था, अर्थात् शमौन, यहुन्ना का पुत्र। यह ऐसा था जैसे प्रभु पूछ रहा हो, “पतरस, क्या तुम्हें हमारे मिलने से पहले का जीवन याद है? क्या तुम्हें अपनी मानवीय कमजोरी याद है?” पतरस का दिमाग दो हफ्ते पहले ऊपरी कक्ष की ओर वापस गया होगा जब उसने घोषणा की थी कि वह यीशु के लिए अपना जीवन भी न्योछावर कर देगा, यदि सब तेरे विषय में ठोकर खाएं तो खाएं, परन्तु मैं कभी भी ठोकर न खाऊंगा(मत्ती 26:33)। मसीह ने पतरस से प्रेम पूर्वक एक सवाल पूछते हुए इस मुद्दे को उठाया, "क्या तू इनसे बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है?"

 

पद 15 में, आपको क्या लगता है कि इन शब्दों "क्या तू इनसे बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है?" यीशु का अर्थ क्या था? शब्द "इनसे" किसे संदर्भित करता है?

 

"इनसे" शब्द क्या दर्शाता है, इसकी दो अलग-अलग संभावनाएं हैं। प्रभु उन अन्य शिष्यों के बारे में बात कर रहा होगा जिनके साथ उसने घनिष्ठ संगति का आनंद लिया था, लेकिन वह जाल, नाव और मछली का भी संदर्भ हो सकता था, जहाँ पतरस ने आजीविका के लिए अपना अधिकांश जीवन बिताया था। शायद, पतरस कल्पना कर रहा था कि उसकी सेवकाई समाप्त हो चुकी थी और उसने सोचा कि उसने खुद को परमेश्वर के राज्य में सेवा से अयोग्य घोषित कर दिया है। लेकिन, प्रभु के साथ, टूटना प्रशिक्षण का हिस्सा है। यीशु के पास उसके लिए कोई तीखी आलोचना नहीं थी, लेकिन उसने पतरस से मायने रखने वाला केवल यही सवाल पूछा, “क्या तू मुझसे प्रेम रखता है? लेखक केंट ह्यूजेस हमें इस बात का विवरण देते हैं कि यह क्षण पतरस के लिए कैसा रहा होगा;

 

समुद्र तट पर आग ने निस्संदेह पतरस को उस आग की याद दिलाई होगी जिसके सम्मुख उसने प्रभु का इंकार किया था। उसके विचार शायद भावना की एक प्रचंड धारा के समान थे - आग की दर्दनाक सुगंध, वही बेबाक, मासूम आँखें, "इनसे बढ़कर," "मैं कभी भी ठोकर न खाऊंगा" "क्या तू मुझसे प्रेम रखता है?" प्रभु के प्रश्न की सामर्थ कृपालुता संग क्रूर थी।

 

प्रभु उसपर केन्द्रित क्यों होता है जिससे पतरस प्रेम करता है? मसीह की सेवा में पुन: स्थापित होने का प्रेम के साथ क्या संबंध है? यीशु ने पतरस से तीन बार क्यों पूछा?

 

परमेश्वर के राज्य में सभी सेवा मसीह के लिए प्रेम से निकलती हैं। यदि यह किसी अन्य मकसद के लिए है, तो जब प्रभु वापस आएगा, यह लकड़ी, घास, और ठूंठ जैसा होगा जिसका कोई इनाम नहीं होगा (1 कुरिन्थियों 3:10-15)। केवल मसीह के व्यक्ति के लिए प्रेम और विश्वास से प्रेरित सेवा का ही अनन्त मूल्य होगा। पतरस उम्मीद कर रहा होगा कि यीशु कई बातें कहेगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह मसीह के लिए अपने प्रेम के बारे में पूछे जाने की योजना बना रहा था। जब यीशु ने पतरस से पहली बार पूछा, तो उसने उससे पूछा कि क्या वह उसे अगापे प्रेम रखता है। अगापे एक बलिदान का प्रेम है जो बदले में बिना किसी उम्मीद के दूसरे के लाभ के लिए स्वेच्छा से असुविधा, कष्ट और यहाँ तक ​​कि मृत्यु भी सहन करता है। पतरस ने अपने प्रेम का वर्णन करने के लिए यूनानी शब्द अगापे का उपयोग करने से बचते हुए यह कहकर उत्तर दिया कि वह मसीह से प्रीतिमय प्रेम रखता है। वह अब आत्मविश्वासी नहीं रहा और उसने स्वीकार किया कि प्रभु के कोमल अगापे प्रेम की तुलना, उसका प्रेम अगापे प्रेम के रूप में चित्रित किया जाने के लिए अपर्याप्त था। तीन बार के इंकार के लिए, तीन बार की पुन: नियुक्ति में प्रश्न यह था कि पतरस अपने जीवन में पहला स्थान किसे देगा। प्रभु ने पतरस को प्रभु के मेमनों को चराने, उसकी भेड़ों की रखवाली करने और उसकी भेड़ों को चराने के लिए पुन: स्थापित किया; यह एक पासबान का प्राथमिक कार्य है, अर्थात्, परमेश्वर के झुंड को चराना।

 

पद 15-17 में यीशु के साथ पतरस की बातचीत के परिणामस्वरूप, आपको क्या लगता है कि पतरस के दिल में क्या बदलाव आए होंगे?

 

अन्य शिष्यों की उपस्थिति में पतरस की पुन: स्थापना पूरी हुई। उसे अन्य शिष्यों के सम्मान, संगति और समर्थन की आवश्यकता होगी। पतरस के तीन इनकारों के उत्तर में प्रेम के तीन अंगीकार किए गए थे, और प्रभु के तीन पुन: नियुक्ति के कथन थे।

 

हमें यह समझने की जरूरत है कि पतरस के लिए मसीह का प्रेम उतना ही और वैसा ही मजबूत था जैसा उसके इनकार के पहले था। हमारी असफलताओं से हमारे लिए प्रेम कम नहीं होता। महत्वपूर्ण बात यह है कि मसीह के लिए प्रेम और कृतज्ञता हमेशा हमारा केंद्र होने चाहिए। प्रभु यीशु के अनुग्रह और अपने जीवन के लिए परमेश्वर की बुलाहट पर लौटकर आएँ। पतरस ने अपने जीवन के लिए परमेश्वर की बुलाहट का प्रति-उत्तर दिया और अंततः अपने विश्वास के लिए शहीद हो गया। जब यीशु ने पतरस से यह कहा तो इसकी भविष्यवाणी की थी;

 

18मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्धकर जहाँ चाहता था, वहाँ फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्धकर जहाँ तू न चाहेगा वहाँ तुझे ले जाएगा।” 19उसने इन बातों से बता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उससे कहा, मेरे पीछे हो ले”। (यहुन्ना 21:18-19)

 

हम अब यहुन्ना की पुस्तक में अपने अध्ययन के अंत में आ गए हैं। मुझे आशा है कि आपको भी, मेरी तरह ही, हम सभी के लिए मसीह के गहरे प्रेम का एक बार फिर स्मरण हुआ होगा। परंपरा हमें बताती है कि प्रेरित यहुन्ना एक लंबी ज़िंदगी जीता है, और अंत तक, निरंतर प्रेम उनका विषय रहता है। यह दर्ज किया गया है कि यहुन्ना हिंसक मौत से बचने वाला एकमात्र व्यक्ति था, हालांकि उसने अपनी सेवकाई के दौरान उत्पीड़न का सामना किया (उदाहरण के लिए, रोम में उबलते हुए तेल में डाला जाना, और बाद में पतमुस द्वीप पर निर्वासन में भेजा जाना जहाँ उन्होंने प्रकाशितवाक्य की पुस्तक लिखी थी)। परंपरा है कि यहुन्ना शहीद नहीं हुए थे बल्कि पतमुस से रिहा होकर बुढ़ापे तक इफिसुस (अब तुर्की में) में रहे थे, जहाँ वे अक्सर उस शहर में मसीहियों से कहते थे, "छोटे बालकों, एक दूसरे से प्रेम करो!"

 

यहुन्ना के इस अंतिम अध्याय के अंत में हम प्रभु की दो आज्ञाएँ आपके साथ छोड़ते हैं। यह आज्ञाएँ हैं "मेरी भेड़ों को चाराओ" और "मेरे पीछे चलो।"

 

प्रार्थना: पिता, जीवन के उन शब्दों के लिए धन्यवाद, जो हमने यहुन्ना की पुस्तक में पढ़े हैं। मसीह के प्रेम, अनुग्रह और दया के लिए भी धन्यवाद, जो हम में से प्रत्येक के लिए उपलब्ध है। आपने हमारे लिए क्रूस पर जो किया है, उसके माध्यम से हमें अंदर से बाहर बदलना जारी रखें। प्रभु यीशु, आप शीघ्र आएँ, हम आपको आपकी महिमा में देखने की लालसा में हैं। आमिन!

 

कीथ थॉमस

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